होर्मुज संकट टला, भारत को बड़ी राहत! नागपुर की कंपनी के जहाज 22,000 मीट्रिक टन रसोई गैस लेकर वतन रवाना

Nagpur Strait of Hormuz: होर्मुज क्षेत्र में तनाव कम होने से भारत को बड़ी राहत मिली है। 22 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लेकर दो जहाज भारत के लिए रवाना हुए हैं, जो कई महीनों से फंसे हुए थे।
Hormuz crisis averted, major relief for India! Ship belonging to a Nagpur-based company sets sail for home with 22,000 metric tonnes of LPG.
होर्मुज जलडमरूमध्य, (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Middle East Tensions: होमुंज में तनाव कम होने से भारत को राहत की सांस मिलने लगी है। खाड़ी देशों से कच्चे तेल और एलपीजी के टैंकरों ने अब न केवल भारत बल्कि दूसरे देशों के लिए भी राह पकड़ ली है। ऐसे ही 2 जहाज भारत के लिए रवाना हो गए हैं। ईरान संकट के कारण ये दोनों जहाज 4 महीने से होर्मुज में फंसे हुए थे। नागपुर की प्रमुख निजी कंपनी कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम की ओर से चार्टर किए गए इन जहाजों में 22,000 मीट्रिक टन (एमटी) रसोई गैस लोड है। ये दोनों जहाज रविवार सुबह होर्मुज के दोबारा बंद होने से ठीक पहले वहां से बाहर निकलने में कामयाब रहे।

भारत को मिलेगी बड़ी राहत

कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम के सूत्रों के अनुसार ये दोनों जहाज एक सप्ताह के भीतर भारत के बंदरगाह पर पहुंच जाएंगे। इसके अलावा एक और बड़ी राहत यह है कि अल्जीरिया से 22,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आ रहा एक अन्य जहाज भी भारतीय समुद्री सीमा में प्रवेश कर चुका है और जल्द ही बंदरगाह पर लंगर डालेगा।

इन जहाजों के भारत आने से देश की रसोई गैस सप्लाई को बड़ी राहत मिलेगी। कप्तानों ने उठाया मौके का फायदा कंपनी के चेयरमैन नितिन खारा ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक समझौता ज्ञापन के बाद इस समुद्री रास्ते को कुछ समय के लिए खोला गया था। हमारे कप्तानों ने बेहद बहादुरी भरा कदम उठाया और इस छोटे से मौके का फायदा उठाकर जहाजों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया जिससे हमने राहत की सांस ली है।

कंपनी ने उठाए ये बड़े कदम

भारत के सबसे बड़े निजी एलपीजी बॉटलर्स में से एक कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम को इस महीने करीब 50,000 टन एलपीजी की जरूरत थी। युद्ध की शुरुआत में सप्लाई चेन टूटने के कारण कंपनी को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था जिससे निपटने के लिए उन्होंने ये कदम उठाए। चीन जा रहे 2 जहाजों को अतिरिक्त रकम चुकाकर भारत की तरफ मोड़ा गया जिनमें 50,000 मीट्रिक टन एलपीजी थी।

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