3 दिन और 18 लाख गाड़ियां, HSRP नंबर प्लेट लगाना नामुमकिन, अब शासन पर टिकी निगाहें

HSRP Number Plate: महाराष्ट्र में दोपहिया और चार पहिया वाहनों में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगाने की आखिरी तारीख 15 अगस्त तय की गई है। लेकिन यह अभियान पूरा करना अब नामुमकिन हो गया है।
HSRP Number Plate: महाराष्ट्र में दोपहिया और चार पहिया वाहनों में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगाने की आखिरी तारीख 15 अगस्त तय की गई है। लेकिन यह अभियान पूरा करना अब नामुमकिन हो गया है।
HSRP नंबर प्लेट (फाइल फोटो)
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HSRP Number Plate: महाराष्ट्र शासन द्वारा 2019 के पहले पंजीकृत सभी दोपहिया व चारपहिया वाहनों पर 15 अगस्त 2025 से पहले हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) लगाना अनिवार्य किया गया है। लेकिन नागपुर जिले की वस्तुस्थिति देखकर यह लक्ष्य पूरा होना लगभग असंभव प्रतीत हो रहा है।

ग्राहक न्याय परिषद, नागपुर द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार जिले में कुल 22 लाख 34 हजार वाहनों को HSRP नंबर प्लेट लगाई जानी है, जबकि अब तक केवल 4 लाख वाहनों पर ही यह प्रक्रिया पूरी हो सकी है। इसका मतलब है कि 18 लाख वाहन अब भी इस नियम के बाहर हैं और अंतिम तारीख आने में केवल 3 दिन शेष हैं।

RTO कार्यालय में औपचारिक निवेदन

इस संदर्भ में ग्राहक न्याय परिषद के जिलाध्यक्ष डॉ. बिप्लव मजुमदार के नेतृत्व में परिषद के पदाधिकारियों ने नागपुर आरटीओ कार्यालय में एक औपचारिक निवेदन प्रस्तुत किया। संगठिका रीना राऊत, कोषाध्यक्ष अभय राऊत, संस्कृति प्रमुख रजनी चव्हाण और सदस्य अमित राय ने निवेदन में स्पष्ट किया कि इतने कम समय में लाखों वाहन चालकों द्वारा पंजीकरण या नंबर प्लेट लगवाना संभव नहीं है। परिषद ने शासन व आरटीओ विभाग से तारीख आगे बढ़ाने की मांग की है।

योजना की असफलता के पीछे का ये कारण

ग्राहक न्याय परिषद द्वारा किए गए सर्वेक्षण में इस योजना की असफलता के पीछे कई वजहें सामने आई हैं। जिसमें महाराष्ट्र में HSRP नंबर प्लेट का शुल्क अन्य राज्यों की तुलना में अधिक होना, प्लेट लगाने वाली अधिकृत एजेंसियों की संख्या अपर्याप्त होना, ऑनलाइन पंजीकरण में तकनीकी कठिनाइयां आना, जनजागरूकता का अभाव भी एक बड़ा कारण है। परिषद के अनुसार, इस मुद्दे को लेकर एक याचिका उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।

कार्रवाई या राहत?

परिषद ने आशंका जताई है कि यदि डेडलाइन नहीं बढ़ाई गई और 15 अगस्त के बाद पुलिस विभाग कार्रवाई करता है, तो लाखों वाहन चालकों में शासन व प्रशासन के प्रति आक्रोश की स्थिति बन सकती है। परिषद का कहना है कि इस योजना में सुधार, त्रुटियों का समाधान, और नागरिकों को पर्याप्त सुविधा देना आवश्यक है न कि जबरन कार्रवाई।

मुख्यालय व शासन स्तर पर लिया जाएगा निर्णय

अभी तक न तो न्यायालय से कोई निर्देश प्राप्त हुए हैं और न ही मुख्यालय से कोई आदेश आया है। उन्होंने कहा कि निर्णय मुख्यालय व शासन स्तर पर ही लिया जाएगा। - संतोष कुमार काटकर, प्रादेशिक परिवहन अधिकारी।

अब निगाहें शासन पर

अब पूरा राज्य इस बात पर नजर लगाए हुए है कि, क्या सरकार अंतिम क्षणों में डेडलाइन बढ़ाने का निर्णय लेगी? या फिर 15 अगस्त के बाद कड़ी कार्रवाई शुरू की जाएगी? इस स्थिति में शासन की ओर से तत्काल हस्तक्षेप और समाधान की अपेक्षा की जा रही है ताकि यह योजना सफल हो सके और जनता में विश्वास बना रहे।

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