होम्योपैथ की ‘घुसपैठ’ पर आईएमए आक्रामक, आज प्राइवेट अस्पतालों में ओपीडी, इमरजेंसी 24 घंटे बंद

Homeopathic Doctors: होम्योपैथ डॉक्टरों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में पंजीयन देने संबंधी जारी की गई अधिसूचना के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने 18 सितंबर को अस्पताल बंद रखने का फैसला किया।
Homeopathic Doctors: होम्योपैथ डॉक्टरों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में पंजीयन देने संबंधी जारी की गई अधिसूचना के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने 18 सितंबर को अस्पताल बंद रखने का फैसला किया।
आईएमए (सौजन्य-नवभारत)
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Private Hospital Closed: नागपुर में सरकार द्वारा होम्योपैथ डॉक्टरों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में पंजीयन देने संबंधी जारी की गई अधिसूचना के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने 18 सितंबर को सभी प्राइवेट अस्पताल बंद रखने का निर्णय लिया है। 19 सितंबर को सुबह 8 बजे से अस्पतालों में ओपीडी और इमरजेंसी सेवा बंद रखी जाएगी। इसके बाद भी सरकार द्वारा गंभीरता नहीं दिखाई गई तो राज्य भर के डॉक्टर मुंबई में एकत्रित होकर आंदोलन करेगे।

आईएमए के अध्यक्ष डॉ. राजेश सावरबांधे ने बताया कि अधिसूचना के अनुसार बुधवार से होम्योपैथ डॉक्टरों के पंजीयन की शुरुआत हो गई है। इस संबंध में याचिका बंबई उच्च न्यायालय में प्रलंबित है। न्यायालय के निर्णय से पहले ही सरकार ने अध्यादेश जारी कर एक तरह से अवमानना की है। होम्योपैथ डॉक्टरों के लिए बनाया गया सीसीएमपी पाठ्यक्रम 600 घंटे का है।

इससे केवल प्राथमिक जानकारी ही मिलेगी जबकि एमबीबीएस डॉक्टर साढ़े पांच वर्ष तक 19 विषयों की पढ़ाई करते हैं। सभी विषय एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। आखिर दोनों पैथी की बराबरी कैसे हो सकती है। होम्योपैथिक डॉक्टरों का पंजीयन सीसीएच में होता ही है। फिर उन्हें एमएमसी में पंजीकृत करना कहां तक योग्य है।

मरीजों की जान से खिलवाड़

इस निर्णय से मरीजों को नुकसान होगा। सरकार जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ रही है। भविष्य में इसके गंभीर भुगतने पड़ सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 1,000 लोगों पर 1 डॉक्टर होना चाहिए जबकि महाराष्ट्र में 682 लोगों के लिए 1 एलोपैथ डॉक्टर उपलब्ध है। यानी डॉक्टरों की कमी बिल्कुल नहीं है। नये कॉलेजों के खुलने के बाद 5 वर्ष बाद और डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी।

जब एलोपैथ डॉक्टर पर्याप्त हैं तो फिर होम्योपैथ डॉक्टरों की घुसपैठ का कोई औचित्य ही नहीं है। अगस्त में इसी मांग को लेकर आईएमए द्वारा आंदोलन किया गया था। उस वक्त मुख्यमंत्री ने एमएमसी का पंजीयन नहीं देने का आश्वासन दिया था लेकिन अचानक कुछ ही महीने में मुख्यमंत्री पलट गये।

सरकार को चाहिए कि 5 सितंबर को जारी की गई अधिसूचना जल्द वापस ली जाए अन्यथा राज्य भर में तीव्र आंदोलन की तैयारी की जा रही है। लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पत्र परिषद में डॉ. जितेंद्र साहू, डॉ. वाईएस देशपांडे, डॉ. आशीष दिसावल, डॉ. बीके शर्मा, डॉ. अर्चना कोठारी आदि उपस्थित थे।

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