छोटे आशियानों पर बुलडोजर, रसूखदारों को बाइज्जत बरी! सीएम की नगरी नागपुर में मनपा का ये कैसा न्याय?

Nagpur Illegal Construction: नागपुर में अवैध निर्माण पर मनपा की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि छोटे मकानों पर कार्रवाई हो रही है, जबकि बड़े और रसूखदार निर्माण अब भी कार्रवाई से दूर हैं।
Nagpur Municipal Corporation's action against illegal construction in Nagpur
नागपुर में अवैध निर्माण पर मनपा की कार्रवाईफोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन
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Nagpur Illegal Building Action: नागपुर में मुख्यमंत्री का शहर पिछले कुछ वर्षों में अवैध निर्माण की चपेट में आ गया है। बड़ी-बड़ी बिल्डिंगें मनपा के अधिकारियों के आशीर्वाद से चन रही हैं। एक बार बन जाने के बाद उन्हें तोड़ने या कार्रवाई करने की हिम्मत मनपा में नहीं है। यह अलग बात है कि मीटिंग दर मीटिम आदेश जारी किए जाते हैं। फाइलें बनती हैं और फिर वह जोन कार्यालयों में धूल फांकती रहती है क्योंकि मुख्यालय में नगर रचना विभाग, अग्निशमन विभाग से उन्हें कोई सहयोग नहीं मिल पाता है।

ये अपने 'अभिप्राय' के मक्कड़‌जाल में उन्हें फंसा लेते हैं और मामला चलता रहता है। सीएम सिटी में महापौर और आयुक्त तक कुछ कर पाने में खुद को अक्षम समझने लगे हैं। यह अलग बात है कि हाई कोर्ट के इंटर के बाद ये दिखावे के लिए मीटिंग, आदेश का खेल खेलते रहते हैं। हाई लेबल कमेटी की मीटिंग के बाद सभी जोन को टारगेट दिया गया है। टारगेट में वही ढाक के तीन पात वाली कहानी दोहराई गई है।

छोटे-छोटे आशियाने को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि बड़े रसूखदार 'बाइज्जत बरी' हैं। सभी जोन द्वारा दी गई सूचियों में छोटे और मध्यम परिवार वाले ही दिख रहे हैं। चूंकि इनकी पहुंच और पकड़ 'ऊपर' तक नहीं है और ये लोग 'खर्चा-पानी भी नहीं कर सकते हैं, इसलिए ऐसे लोगों पर कार्रवाई कर मनपा जोन कार्यालय, अग्निशमन विभाग, एनडीएस और नगर रचना विभाग अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। कार्रवाई करने की हुंकार भर हाई कोर्ट को गुमराह करने का काम कर रही है।

अवैध बिल्डिंगों से घिरा CM सिटी

इन्हीं अधिकारियों की कारगुजारियों के कारण समस्याओं के चुंगल में फंसता जा रहा है। सीएम सिटी को ऐसे अधिकारियों ने अवैध बिल्डिंगों का गढ़ बना दिया है। इससे हर तरह की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। रोड चोक हो रहे हैं, सड़क पर पार्किंग की समस्या बढ़ती जा रही है। वाहन सड़कों पर पार्क हो रहे हैं और लोग यात्री वाहन नहीं चला पा रहे हैं। अवैध निर्माण

पर अगर सही मायने में अंकुश नहीं लगाया जाता है तो आने वाले दिनों में सीएम की सिटी बड़े हादसों की सिटी में तब्दील हो जाएगी लेकिन इसके लिए इच्छा शक्ति की जरूरत है और मनपा अधिकारी ये दिखा पाने में नाकाम साबित हो रहे हैं।

लॉन्स-मॉल्स के सामने न हो पार्किंग

अवैध लॉन्स और मॉल्स में पार्किंग तक की जगह नहीं है। यहां रोजाना आने वाले सैकड़ों वाहन केवल 'सड़क' के भरोसे चल रहे हैं। मनपा के अधिकारियों को यह दिखाई नहीं देता है। हाई कोर्ट के आदेश की धज्जियां उड़ाने में भी ये घोड़ा सा संकोच नहीं करते हैं।

लॉन्स के सामने सड़कों पर पार्किंग न हो यह सख्त आदेश हाई कोर्ट ने पिछले दिनों दिए थे लेकिन लॉन्स में बने रेस्टोरेंट, बैंक्वेट में होने वाले पार्टियों के दर्जनों वाहन सड़कों की शोभा बढ़ा रहे हैं और पूरे ट्रैफिक तंत्र को चौपट कर रहे हैं। वह भी सिविल लाईस जैसे क्षेत्र में। इसके बावजूद अधिकारियों की ओर से कोई कदम नहीं उठाना आश्चर्य में ही डालता है।

अवैध निर्माण को बचाना ही मकसद

तमाम प्रक्रियाओं के देखने बाद कोई भी आम जनता यह समझ जाती है कि अधिकारी का गोलचक्क शहर के अवैध इमारतों को बचाने के लिए रचा जाता है।

ये चाहते ही नहीं हैं कि शहर से अवैध निर्माण खत्म हो। महापौर हो या फिर आयुक्त ये अपने 'अभिप्राय' के 'चक्रव्यूह' में सभी को जकड़ लेते हैं और अवैध को वैध बनाने का खेल चलता रहता है।

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हाई कोर्ट में हलफनामा, फिर छुट्टी, भविष्य में चुनौती

जब कभी हाई कोर्ट आदेश देता है, अधिकारी हलफनामा तैयार करने में जुट जाते हैं। इक्के-दुक्के कार्रवाई कर फोटो खींची जाती है और फिर उसे सबूत के तौर पर पेश कर दी जाती है। इस प्रकार हलफनामा देकर ही अधिकानी अपना मतलब साध रहे है, जबकि जमीनी हकीकत इससे पूरी तरह अलग है।

शहर अवैध निर्माण से पटते जा रहा है। भविष्य के नागपुर के लिए चुनौती खड़े कर रहे हैं लेकिन बेपरवाह अधिकार्डरयों को इससे कोई लेना-देना नहीं रह गया है। सभी अपनी नौकरी को बचाये रखने में ही व्यस्त है।

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