

विदर्भ भूदान यज्ञ मंडल ने मध्य प्रदेश भूदान यज्ञ अधिनियम, 1953 की धारा 25 को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
याचिकाकर्ताओं ने धारा 25 को संविधान के अनुच्छेद 14 के विपरीत बताया है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार सहित सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
भूदान जमीनों के नए आवंटन पर 2 दिसंबर 2026 तक अंतरिम रोक लगाई गई है।
Vidarbha Bhoodan Yajna Mandal: विदर्भ भूदान यज्ञ मंडल के मध्य प्रदेश भूदान यज्ञ अधिनियम, 1953 की 'धारा 25' की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश रजनीश व्यास ने राज्य सरकार सहित सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब दायर करने का आदेश दिया।
इसके साथ ही कोर्ट ने भूदान जमीनों के किसी भी नए आवंटन पर अंतरिम रोक लगा दी। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधि. आरएम भांगड़े, अधि. तेजस बैस, जबकि सरकार की ओर से सहायक सरकारी वकील एनएस ऑटकर ने पैरवी की।
आचार्य विनोबा भावे के भूदान आंदोलन का उद्देश्य ही समाप्त याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अदालत में दलील दी कि भूदान आंदोलन के तहत भूमिहीन व्यक्तियों को जमीनों का आवंटन किया जाता है परंतु कानून की धारा 25 के अनुसार, यदि कोई लाभार्थी नियमों का उल्लंघन करता है तो वह जमीन भूदान मंडल के पास वापस आने के बजाय सीधे राज्य सरकार के पास जमा हो जाती है।
वकीलों ने तर्क दिया कि यह प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) के खिलाफ है और इससे आचार्य विनोबा भावे के भूदान आंदोलन का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। इसके अलावा अदालत को यह भी बताया गया कि 4 मई 2026 के एक प्रशासनिक पत्र के अनुसार इन जमीनों को अन्य व्यक्तियों को बांटने की तैयारी चल रही थी।
कोर्ट ने 2 दिसंबर 2026 तक भूदान जमीनों का या 4 मई 2026 के पत्र के अनुसार कोई भी नया आवंटन न करने का आदेश राज्य सरकार को दिया।
कानून की संवैधानिक वैधता का मुद्दा उठने के कारण अदालत ने इस मामले में महाराष्ट्र राज्य के महाधिवक्ता को भी नोटिस जारी किया है।