

Nagpur Heatwave Homeless People: नागपुर शहर का पारा 46 के पार चला गया है। फुटपाथ, रेलवे स्टेशन परिसर, अस्पताल प्रांगण और फ्लाईओवर के नीचे की जगहों और शहर के सुनसान कोने ही कई बेघर लोगों की जिंदगी का सहारा बने हुए हैं। सिर पर छत नहीं, दो वक्त की रोटी की कोई गारंटी नहीं और जीवन की कोई सुरक्षा नहीं। इस उष्णता को ज्वाला में गरीब बेघर लोगों की दुनिया झुलस रही है।
बढ़ती गर्मी, शरीर से बहता पसीना और झुलसाती धूप ही उनके जीवन की सच्चाई बन चुकी है जिनमें जीने की ताकत है वे ही किसी तरह संघर्ष कर रहे हैं, जबकि कई लोगों झुलसाती गर्मी का शिकार होकर दम तोड़ रहे हैं।
मई महीने में बढ़े तापमान के चलते शहर में करीब 25 लोगों को मौत होने की चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के वास्तविक कारण स्पष्ट होंगे लेकिन लू लगना, ब्रेन स्ट्रोक और शरीर में पानी की कमी जैसी वजहों से मौतों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। शहर के विभिन्न पुलिस थाना क्षेत्रों में रोज कहीं न कहीं कोई बेघर व्यक्ति बेहोशी की हालत में मिलता है।
पुलिस उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाती है लेकिन कई बार उपचार शुरू होने से पहले ही जिंदगी की डोर टूट जाती है। समाज में बढ़ता अकेलापन भी एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। भौतिक सुविधाएं होने के बावजूद लोग भावनात्मक रूप से अकेले पड़ते दिखाई दे रहे हैं।
'वह' मौत भी अकेलेपन की थी पांचपावली थाना क्षेत्र में हाल ही में ऐसी ही एक घटना सामने आई। सरकारी नौकरी में कार्यरत एक व्यक्ति का शव 3 दिन तक घर में पड़ा रहा। उसकी पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं था और हालचाल पूछने वाला भी कोई नहीं आया। वहीं जीवनयापन के लिए किसी सहारे के बिना रह रही मां-बेटी के शव घर में मिलने की घटनाएं भी समाज को झकझोर रही हैं।
महाराष्ट्र सासन और नागपुर महानगरपालिका की ओर से शहर में 'निराश्रित निवारा केंद्र' संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों में बेघर लोगों को अस्थायी आश्रय, भोजन और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। हालांकि अब भी कई जरूरतमंदों तक इन सुविधाओं की जानकारी नहीं पहुंच पाई है।
पुलिस आयुक्त रवींद्र कुमार सिंगल के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे 'निशन मुक्ति अभियान के तहत अब तक 3 बरणों में 143 लोगों को भिक्षावृति और असुरक्षित सहक जीवन से बाहर निकाला गया है।
पुलिस सामाजिक संस्थाओं और प्रशासन के समन्वय से बताया जा रहा यह अभियान सामाजिक संवेदनशीलता का उदहरण बन रहा है। यदि समाज के अन्य लोग भी आगे आएं तो कई बेघर लोगों को सुरक्षित आश्रय मिल सकता है और ऐसी मौतों में कमी लाई जा सकती है।