नागपुर में भीषण गर्मी से बच्चे बेहाल: मेडिकल-मेयो के ओपीडी में 30% बढ़े मरीज, 'हीट एक्जरशन' का खतरा

Nagpur Heatwave: नागपुर में भीषण गर्मी के कारण बच्चों में डिहाइड्रेशन और 'हीट एक्जरशन' की शिकायतें तेजी से बढ़ी हैं। सरकारी अस्पतालों के बाल रोग विभागों में मरीजों की संख्या 30 फीसदी तक बढ़ गई है।
Scorching heat in Nagpur has led to a 30% surge in pediatric cases, with children suffering from dehydration and heat exhaustion. Wards in GMC and Mayo are running full.
बच्चों में डिहाइड्रेशन (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Nagpur Heatwave Medical Hospital Children Health: नागपुर में भीषण गर्मी की वजह से सभी हलाकान हैं। बाहर खुले में फुटपाथ पर रहने वालों की तो आफत हो गई है। अब तक शहर में करीब 50 से अधिक अज्ञात मौतें भी दर्ज की गईं। सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों को हो रही है। मेडिकल में पिछले 15 दिनों में जुकाम, लूज मोशन, पेट दर्द की शिकायतें लेकर आने वाले करीब 30 फीसदी बढ़े हैं। डॉक्टरों की मानें तो बारिश शुरू होने तक भीषण गर्मी से बचाव आवश्यक है।

मेडिकल की ओपीडी में हर दिन करीब 300 बच्चे इलाज के लिए आते हैं। इनमें 30 फीसदी गर्मी से प्रभावित आ रहे हैं। यही स्थिति मेयो में भी बनी हुई है। नवजातों में जुकाम आम हो गया है। वहीं 10 वर्ष तक के बच्चों में डिहाइड्रेशन, पेट दर्द, उल्टी, लूज मोशन की शिकायत बढ़ी है।

कई बच्चों को तो गंभीर अवस्था में भर्ती भी किया गया है। इन बच्चों में नागपुर शहर के ही सबसे ज्यादा हैं। गर्मी के दिन होने के कारण अन्य जिलों के मरीज नहीं आ रहे हैं। अन्य जिलों से केवल उन्हीं बच्चों को रेफर किया जा रहा है जिनकी हालत गंभीर बनी हुई है। फिलहाल मेडिकल और मेयो में पीडियाट्रिक वार्ड भरा हुआ है। वार्डों में कूलर सहित अन्य व्यवस्था तो की गई है लेकिन गर्मी ही इतनी है कि सहन करना भारी पड़ रहा है।

तेजी से बढ़ रहा 'हीट एक्जरशन'

मेडिकल के बाल रोग विभाग के प्रमुख डॉ. मनीष तिवारी ने बताया कि इस बार गर्मी अधिक होने से शिकायत भी बढ़ी है। गर्म हवा केवल दिन में ही नहीं, रात में भी परेशान कर रही है। इसका बच्चों के शरीर पर तेजी से असर हो रहा है। इस सीजन में खान-पान पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल राऊत ने बताया कि बच्चों में 'हीट एक्जरशन' की शिकायत तेजी से बढ़ रही है। 'हीट एक्जरशन' यानी उष्माघात से पहले की स्थिति होती है। 5 वर्ष तक के बच्चे इसकी चपेट में जल्दी आते हैं। यदि जुकाम कम न हो तो फिर बच्चों को भर्ती करने की भी नौबत आ रही है। यह स्थिति बारिश होने तक बनी रहेगी। तापमान कम होने के बाद ही राहत मिलेगी।

सावधानी बरतें, करें उपाय

डॉक्टरों की मानें तो नागपुर में भीषण गर्मी में बचने के लिए धूप में आना-जाना टालना ही उचित रहेगा। पानी अधिकाधिक पियें। पानी के साथ ही नींबू पानी और नारियल पानी शरीर में ठंडक बनाए रखता है। पेशाब कम होना या फिर पेट दर्द होने पर चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक है। बच्चों को मनमर्जी की दवा या फिर बिना चिकित्सकीय सलाह की दवा देने से बचें। केवल दिन के वक्त ही नहीं बल्कि रात के वक्त भी गर्म हवाओं से बचने का उपाय करें।

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