नागपुर में स्वास्थ्य सेवाएं ठप! सरकारी नर्सों ने किया 2 घंटे काम बंद आंदोलन; अस्पतालों में मरीज हुए परेशान

Maharashtra Nurses Strike: नागपुर में महाराष्ट्र गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन के आह्वान पर मेडिकल, मेयो सहित सरकारी अस्पतालों में 2 घंटे का कामबंद आंदोलन हुआ। इससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहीं।
Healthcare services in Nagpur disrupted! Government nurses staged a two-hour work stoppage
नागपुर में नर्स आंदोलनसोर्स: नवभारत फाइल फोटो
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Nursing Cadre Service Rules: नागपुर महाराष्ट्र गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन के आह्वान पर मंगलवार को विविध मांगों को लेकर सरकारी नर्सों ने मेडिकल, मेयो, डागा, प्रादेशिक रुग्णालय और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अस्पताल सहित विभिन्न सरकारी अस्पतालों में दो घंटे का काम बंद आंदोलन किया। आंदोलन के कारण सुबह के समय स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहीं और मरीजों व उनके परिजनों को कुछ असुविधा का सामना करना पड़ा।

फेडरेशन का कहना है कि जनस्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग के नर्सिंग कैडर के लिए संशोधित सेवा प्रवेश नियम, संशोधित स्टाफिंग पैटर्न, पदोन्नति प्रक्रिया और सीधी भर्ती को अब तक अंतिम रूप नहीं दिया गया है। इन लंबित मांगों के विरोध में राज्यभर में प्रतीकात्मक आंदोलन किया गया।

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150 दिन की समय-सीमा के बाद भी नहीं हुआ समाधान

नर्सेज फेडरेशन ने बताया कि महाराष्ट्र सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने 2 जून 2025 को जारी सरकारी प्रस्ताव के तहत सेवा संबंधी मामलों के निपटारे के लिए 150 दिनों का कार्यक्रम घोषित किया था। इसमें सभी विभागों को सेवा प्रवेश नियम, संशोधित स्टाफिंग पैटर्न, पदोन्नति, रिक्त पदों पर भर्ती और अन्य लंबित मामलों का निपटारा निर्धारित समय सीमा में करने के निर्देश दिए गए थे।

फेडरेशन के अनुसार, 2 अक्टूबर 2025 को यह समय-सीमा समाप्त हो चुकी है, लेकिन नर्सिंग कैडर से जुड़े अधिकांश महत्वपूर्ण मामले अब भी लंबित हैं। इसके कारण हजारों नर्सें पदोन्नति से वंचित हैं और नए पदों का सृजन व भर्ती प्रक्रिया भी अटकी हुई है।

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काम का बढ़ा बोझ, मरीजों की देखभाल पर असर

नर्सिंग कर्मचारियों का कहना है कि संशोधित स्टाफिंग पैटर्न को मंजूरी नहीं मिलने से अस्पतालों में पर्याप्त नर्सों की नियुक्ति नहीं हो पा रही है। इससे मौजूदा कर्मचारियों पर कार्यभार और मानसिक दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिसका असर मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता पर भी पड़ रहा है।

आंदोलन में शारदा भुते, लीना धुर्वे, मृगेन्द्र तेले, पूनम जांभूलकर, प्रवीण पैठणे, नीलिमा झामरे, कमलेश ताजने, प्रतिभा सहित बड़ी संख्या में नर्सिंग पदाधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। फेडरेशन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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