

Nagpur Illegal Banner Loss: नागपुर में गणेशोत्सव के दौरान करीब 5,000 स्वागत द्वार लगाए जाने का दावा है। आरोप है कि इनमें से किसी के लिए भी मनपा के विज्ञापन विभाग से वैधानिक अनुमति नहीं ली गई।
इन ढांचों पर नेताओं और कारोबारियों के विज्ञापन लगे हैं, जिससे राजस्व नुकसान के साथ यातायात प्रभावित होने की बात सामने आई है।
नागपुर में गणेशोत्सव की रौनक के बीच अवैध स्वागत द्वारों का मुद्दा भी गरमा गया है। शहर में करीब 5,000 स्वागत द्वार लगाए जाने का दावा है, लेकिन आरोप है कि इनके लिए मनपा से जरूरी अनुमति और शुल्क नहीं लिया गया।
इन ढांचों पर गणेशोत्सव के संदेशों से ज्यादा नेताओं और कारोबारियों के पोस्टर नजर आने तथा इनके कारण कई इलाकों में यातायात प्रभावित होने की शिकायतें सामने आई हैं।
नागपुर शहर में 1,000 से अधिक सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल सक्रिय हैं। एक मंडल द्वारा अपने इलाके और प्रमुख संपर्क मार्गों पर औसतन 3 से 5 स्वागत द्वार लगाए जाने का अनुमान है। इस आधार पर शहरभर में करीब 5,000 स्वागत द्वार खड़े होने का दावा किया जा रहा है।
आरोप है कि इन ढांचों में से किसी के लिए भी मनपा के विज्ञापन विभाग से वैधानिक अनुमति नहीं ली गई और न ही निर्धारित शुल्क जमा किया गया। यदि यह स्थिति सही है तो इससे नगर निगम के राजस्व को बड़ा नुकसान होने की आशंका है।
इन स्वागत द्वारों पर धार्मिक संदेशों के साथ स्थानीय नेताओं, सांसदों, विधायकों, पूर्व पार्षदों, संभावित चुनावी उम्मीदवारों और प्रायोजक कारोबारियों की बड़ी तस्वीरें दिखाई दे रही हैं। इससे गणेशोत्सव के नाम पर राजनीतिक और व्यावसायिक प्रचार किए जाने के आरोप लग रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि मनपा प्रशासन त्योहार के दौरान ऐसे ढांचों पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं करता। आरोप है कि हर साल उत्सव समाप्त होने के बाद बैनर और अवैध विज्ञापन हटाने की औपचारिक कार्रवाई की जाती है।
अवैध स्वागत द्वारों का असर यातायात व्यवस्था पर भी पड़ने की बात कही जा रही है। भारी बांस-बल्ली और लोहे के खंभे सड़क के दोनों ओर लगाए जाने से कई जगह पहले से संकरी सड़कें और कम चौड़ी हो जाती हैं।
नागपुर गणेशोत्सव के दौरान शाम के समय श्रद्धालुओं और वाहनों की संख्या बढ़ने से प्रमुख चौराहों पर जाम की स्थिति बनने की शिकायत है। अंधे मोड़ों और चौराहों के पास लगाए गए बड़े स्वागत द्वार सामने से आने वाले वाहनों की दृश्यता भी प्रभावित कर सकते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ने की आशंका है।
जागरूक नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मनपा से ऐसे सभी स्वागत द्वारों का सर्वेक्षण कराने, यातायात बाधित करने वाले ढांचों को तत्काल हटाने और बिना अनुमति लगाए गए विज्ञापनों पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
अब निगाहें मनपा प्रशासन पर हैं कि वह गणेशोत्सव के दौरान लगाए गए इन स्वागत द्वारों को लेकर क्या कार्रवाई करता है और नगर निगम के राजस्व तथा शहर की यातायात व्यवस्था को प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर कैसे अंकुश लगाया जाता है।