

Nagpur Gandhisagar Lake Restoration: नागपुर महल क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहर और दुर्लभप्राकृतिक जलस्रोतों में से एक गांधीसागर तालाब के पुनरुद्धार का काम पिछले 4 वर्षों से कछुआ चाल से चल रहा है। महानगर पालिका द्वारा विकास के नाम पर किए जा रहे अनियोजित प्रयोगों से शहरवासियों को अब यह डर सताने लगा है कि कहीं सौंदयीकरण की आड़ में तालाब का 'नुकसान' तो नहीं हो रहा है।
इस संपूर्ण पुनरुजीवन योजना के लिए 49.82 करोड़ रुपये की प्रशासकीय मंजूरी दी गई थी। अब तक 36.92 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जा चुकी है, लेकिन पहले चरण का काम अभी तक आधा-अधूरा ही पड़ा है। मनपा का दावा है कि पहला चरण पूरा हो गया है और दूसरे चरण पर चर्चा चल रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि लगातार चार गर्मियों से यह काम बेहद धीमी गति से चल रहा है।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिस जगह पर अब म्यूजिकल फाउंटेन प्रस्तावित किया गया है, ठीक उसी जगह पर 9 जनवरी 2020 को बड़े ही तामझाम के साथ 'खाऊ गली' का उद्घाटन किया गया था।
यह योजना पूरी तरह से फ्लॉप रही और आज भी वहां उस ध्वस्त हो चुकी खाऊ गली के अवशेष पड़े हुए हैं। प्रशासन ने आज तक इस बात का जवाब नहीं दिया कि खाऊ गली परियोजना क्यों विफल हुई और अब बिना कोई जवाबदेही तय किए उसी स्थान पर एक नया फाउंटेन प्रोजेक्ट थोपा जा रहा है।
पर्यावरणानियों ने ने इस इ बात पर गहनी चिंता और खेद व्यक्त किय कि करोड़ों रुपये केवल दिखावटी सौदयीकरण पर खर्च किए जा रहे हैं, जबकि तालाब की मुख्य समस्याओं जमा हुई गाद और उसमे मिलने वाले गंदे पानी सीवेज) पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।इसके अलावा, नागरिकों की शिकायत है कि जनता के पैसे से ऐसे बड़े और महंगे प्रोजेक्ट बनाते समय उनकी कोई राव या विचार-विमर्श नहीं किया जाता