नागपुर डिजिटल एसेट घोटाले के मास्टरमाइंड राकेश गर्ग को जमानत, MPID कोर्ट ने रखी ये कड़ी शर्तें

Nagpur Digital Asset Scam: नागपुर के फ्यूचर डिजिटल एसेट स्कीम घोटाले के मुख्य आरोपी राकेश गर्ग को विशेष MPID कोर्ट ने जमानत दे दी है। जांच पूरी होने और खाते फ्रीज होने के आधार पर राहत मिली।
Future Digital Asset Scheme Fraud
फ्यूचर डिजिटल एसेट स्कीम घोटाले प्रतीकात्मक तस्वीर, सोर्स- AI
Published on: 
Updated on: 

Future Digital Asset Scheme Fraud: नागपुर जिले में करोड़ों रुपए के कथित फ्यूचर डिजिटल एसेट स्कीम घोटाले में कंपनी के निदेशक एवं कथित मास्टरमाइंड राकेश गर्ग को विशेष MPID न्यायालय ने जमानत दे दी।

विशेष न्यायाधीश एए आयाचित ने जमानत मंजूर करते हुए गर्ग को जांच में सहयोग करने और जांच अधिकारी द्वारा बुलाए जाने पर उपस्थित रहने के निर्देश दिए। अदालत की अनुमति के बिना विदेश यात्रा नहीं करने का भी आदेश दिया गया है।

राकेश गर्ग और एजेंट मेहुल दीक्षित के खिलाफ मामला दर्ज था

शिकायत के अनुसार,कृपया इनपुट टेक्स्ट प्रदान करें ताकि मैं इसे हिंदी में पैराफ्रेज कर सकूं।निवेशकों को 9,000 रुपये जमा करने पर एक महीने में ऑनलाइन वॉलेट में 12,500 रुपए मिलने और 25 निवेशक जोड़ने पर भारी कमीशन व मर्चेंट कॉइन का लालच दिया गया था।

रकम जमा करने के बाद निवेशकों को कथित तौर पर वादे के अनुसार लाभ नहीं मिले। इस मामले में राकेश गर्ग और नागपुर जिले के एजेंट मेहुल दीक्षित के खिलाफ बीएनएस, एमपीआईडी एक्ट और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था।

राकेश गर्ग की ओर से अधिवक्ता कमल सतुजा, कैलाश डोडानी और हितेश खंडवानी ने जमानत के पक्ष में दलील दी। उन्होंने कहा कि निवेशकों को योजना समझाने और रकम स्वीकार करने का आरोप मुख्य रूप से मेहुल दीक्षित पर है।

Future Digital Asset Scheme Fraud
UGC का बड़ा फैसला: MPT-MOT में अब मिलेगी स्पेशलाइजेशन डिग्री, ऑप्टोमेट्री कोर्स की अवधि भी बढ़ी

अधिवक्ता गिरीश दुबे ने जमानत का विरोध किया

राकेश गर्ग के व्यक्तिगत खाते में किसी निवेशक की रकम जमा नहीं हुई और आरोप पत्र में भी किसी निवेशक ने यह नहीं कहा है कि गर्ग ने उसे निवेश के लिए प्रेरित किया। बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि जांच पूरी हो चुकी है और आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है।

गर्ग और उसकी कंपनियों के बैंक खाते पहले ही फ्रीज हैं जिनमें 2.28 करोड़ रुपये से अधिक की राशि है, जबकि आरोप पत्र में अब तक कथित गबन की राशि करीब 5.40 लाख रुपये बताई गई है। बचाव पक्ष ने कहा कि यदि कोई रकम वसूल की जानी है तो फ्रीज खातों से उसे समायोजित करने पर गर्ग को आपत्ति नहीं है।

अभियोजन की ओर से अधिवक्ता गिरीश दुबे ने जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने राकेश गर्ग को जमानत दे दी। साथ ही पासपोर्ट का विवरण प्रस्तुत करने और जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए हैं।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com