क्या प्रतिभा बन रही पहचान या पहचान से मिल रहा मौका? नागपुर फुटबॉल टीम चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल

Nagpur Football Association: नागपुर फुटबॉल टीम चयन प्रक्रिया को लेकर पूर्व खिलाड़ियों ने पक्षपात के गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं NDFA ने प्लेइंग 11 के रिकॉर्ड और नए नियमों का हवाला देकर सफाई दी है।
Nagpur District Football Football Team Selection Rules Sports
नागपुर में फुटबॉल मैच के दौरान खिलाड़ीप्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स- AI
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Nagpur District Football Team Selection Rules Sports News: किसी भी खिलाड़ी के लिए सबसे बड़ा सपना होता है अपने जिले, राज्य और देश का प्रतिनिधित्व करना। इसके लिए वह वर्षों तक मैदान पर पसीना बहाता है। सुबह-शाम अभ्यास करता है, चोट सहता है और एक मौके का इंतजार करता है, लेकिन जब चयन की घड़ी आती है तो खिलाड़ी के मन में एक ही सवाल होता है।

क्या मेरा प्रदर्शन मेरी पहचान बनेगा या पहचान मेरा प्रदर्शन तय करेगी?

नागपुर फुटबॉल में भी चयन प्रक्रिया को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। कुछ पूर्व खिलाड़ियों और कोचों का आरोप है कि कई बार योग्य खिलाड़ियों को वह अवसर नहीं मिल पाता जिसके वे हकदार होते हैं।

वहीं कुछ फुटबॉल जानकारों का मानना है कि चयन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाया जाना चाहिए, हालांकि एनडीएफए ने इन आरोपों को खारिज करते हुए चयन की पूरी प्रक्रिया सामने रखी है। ऐसे आरोपों के बीच बड़ा सवाल यही है कि आखिर जिला टीम बनती कैसे है?

पूर्व खिलाड़ियों की भूमिका जरूरी

खालिक पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी अब्दुल खालिक का कहना है कि फुटबॉल में लंबे समय तक खेलने वाले खिलाड़ियों के अनुभव का उपयोग व्यवस्था को बेहतर बनाने में किया जाना चाहिए, उनका सवाल है कि जिन खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर तक खेला है, उन्हें तकनीकी और चयन प्रक्रिया में सलाहकार की भूमिका क्यों नहीं दी जाती?

नागपुर और महाराष्ट्र के एकमात्र द्रोणाचार्य अवार्डी विमल घोष भी मेरिट और सही खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर देते हैं। उनके अनुसार यदि अच्छे खिलाड़ियों को लगातार अवसर मिलेंगे तो ही शहर के फुटबॉल का स्तर ऊपर जाएगा, नागपुर डिस्ट्रिक्ट एसोसिएशन (एनडीएफए) में ऐसे कोई भी पदाधिकारी या व्यवस्था नहीं दिखती जो अनुभव को तरजीह देती हो।

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चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता क्यों जरूरी ?

किसी भी खेल संस्था के लिए सबसे जरूरी खिलाड़ियों का विश्वास है। इसके लिए जरूरी है कि खिलाड़ियों के चयन के स्पष्ट नियम तय हों। ट्रायल की प्रक्रिया पहले से तय हो, और उसी आधार पर चयन हों। जब टीम का चयन हो तो चयनकर्ताओं की भूमिका स्पष्ट होना चाहिए।

खिलाड़ियों के प्रदर्शन का रिकॉर्ड रखा जाए ताकि समय पर काम आएं। खिलाड़ियों को फीडबैक भी दिया जाना चाहिए क्योंकि एक खिलाड़ी के लिए चयन केवल एक टीम में जगह नहीं होती बल्कि उसके पूरे करियर की दिशा तय कर सकता है।

टैलेंट रह जाता है पीछे

नागपुर और महाराष्ट्र के पूर्व खिलाड़ियों का कहना है कि फुटबॉल में चयन का आधार केवल प्रदर्शन होना चाहिए। खिलाड़ी ने मैदान पर कैसा प्रदर्शन किया, उसकी फिटनेस कैसी है, बड़े मुकाबलों में उसका प्रदर्शन कैसा रहा- इन बातों को सबसे ज्यादा महत्व मिलना चाहिए।

पूर्व जिला टीम के कोच मीर अदनान अली ने चयन प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कई बार प्रतिभाशाली खिलाडियों को पर्याप्त अवसर नहीं मिलते और पहचान रखने वाले खिलाडी आगे आ जाते हैं।

उन्होंने दावा किया कि कुछ मामलों में योग्य खिलाडियों की जगह कम अनुभवी खिलाड़ियों को मौका मिला। वहीं उनका कहना है कि 2012 में उन्होंने कुछ ऐसे खिलाड़ियों को जिला टीम में शामिल करने का सुझाव दिया था जो संतोष ट्रॉफी चयन के अंतिम चरण तक पहुंचे थे, उनके अनुसार बाद में वही टीम इंटर डिस्ट्रिक्ट प्रतियोगिता में सफल रही।

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मुबीन बोले- चयन नहीं हुआ तो आरोप लगाना आसान

एनडीएफए के डिप्टी जनरल सेक्रेटरी मोहम्मद मुबीन ने पक्षपात के आरोपों को नकारते हुए कहा कि किसी खिलाड़ी का चयन नहीं होने पर चयनकर्ताओं पर आरोप लगना केवल फुटबॉल तक सीमित नहीं है। लगभग हर खेल में ऐसी शिकायते सामने आती है। उनके अनुसार चयन समिति खिलाड़ियों को परखकर संभावित खिलाड़ियों का समूह तैयार करती है और जरूरत के अनुसार कोच को भी प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।

इसके बाद चुने गए खिलाड़ी कैंप में कोच के सुपुर्द किए जाते हैं। इस बार चयन में एक दिलचस्प पैमाना भी अपनाया गया, मुबीन के अनुसार लीग मुकाबलों में कौन खिलाड़ी अपनी क्लब टीम की प्लेइंग 11 में कितनी बार उतरा, इसका बाकायदा रिकॉर्ड तैयार किया गया।

इसके पीछे तर्क था कि जो खिलाड़ी अपने क्लब की पहली एकादश में नियमित जगह नहीं बना पा रहा, उसे सीधे जिला टीम में शामिल करने का आधार क्या होगा? इसी रिकॉर्ड के आधार पर विभिन्न टीमों से नियमित खेलने वाले खिलाड़ियों को चयन प्रक्रिया के लिए बुलाया गया।

नवभारत लाइव के लिए नागपुर से जयदीप रघुवंशी की रिपोर्ट

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