63 की उम्र और 25 KM की तैराकी! नागपुर के डॉ. राजेंद्र जायसवाल ने नर्मदा की लहरों पर लिखा नया इतिहास

Dr. Rajendra Jaiswal Nagpur: नागपुर के 63 वर्षीय डॉ. राजेंद्र जायसवाल का अद्भुत कारनामा; नर्मदा नदी में 8 घंटे 13 मिनट तक बिना रुके 25.65 KM तैराकी कर रचा इतिहास। युवाओं के लिए बने मिसाल।
63-year-old Dr. Rajendra Jaiswal from Nagpur sets a record by swimming 25.65 km non-stop in Narmada river in 8 hours 13 minutes. Inspired by Fit India movement.
डॉ राजेंद्र ने बनाया नेशनल रिकॉर्ड (सौजन्य-नवभारत)
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25.65 km Swimming Record: 60 की उम्र के बाद जब अधिकांश लोग आराम की ओर बढ़ते हैं, उस पड़ाव पर 63 वर्षीय डॉ. राजेंद्र जायसवाल ने अद्भुत साहस, जज्बे और फिटनेस का परिचय देते हुए नर्मदा नदी में 25.65 किलोमीटर की लगातार तैराकी कर नया कीर्तिमान स्थापित किया। उन्होंने यह कठिन चुनौती 8 घंटे 13 मिनट में पूरी की। 11 मार्च को हुई इस ऐतिहासिक तैराकी को नर्मदा में अब तक का सबसे लंबा तैराकी प्रयास माना जा रहा है।

आयोजन जय माता दी समिति, पिपरिया (मध्य प्रदेश) द्वारा किया गया। नागपुर निवासी डॉ. जायसवाल ने साबित कर दिया कि उम्र सिर्फ एक संख्या है और मजबूत इच्छाशक्ति के आगे हर सीमा छोटी पड़ जाती है। रिकॉर्ड पूरा होने पर उनका भव्य सम्मान किया गया, जिसमें स्थानीय गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

फिट इंडिया अभियान से मिली प्रेरणा

इस उपलब्धि के पीछे की प्रेरणा बताते हुए उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘फिट इंडिया’ अभियान से प्रेरित हैं और युवाओं को फिटनेस, नर्मदा की स्वच्छता तथा क्षेत्रीय पर्यटन के प्रति जागरूक करना चाहते हैं। वे कहते हैं कि उन्होंने नर्मदा नदी और पिपरिया को इसलिए चुना क्योंकि वे मूल निवासी पिपरिया के ही हैं।

डॉ. जायसवाल पहले भी कई असाधारण कारनामे कर चुके हैं। 62 वर्ष की आयु में उन्होंने अमेरिका में फुल आयरनमैन कैलिफोर्निया पूरा कर इस उम्र में ऐसा करने वाले पहले भारतीय बनने का गौरव प्राप्त किया था। 161 किमी अल्ट्रा मैराथन, तिरंगे के साथ 81 किमी निरंतर दौड़ तथा कोविड काल में घर के भीतर 85 किमी दौड़ने जैसे रिकॉर्ड भी उनके नाम हैं।

करीब 13 वर्ष पहले डॉक्टरों ने उनके दोनों घुटनों की सर्जरी की सलाह दी थी, लेकिन उन्होंने अनुशासन, नियमित अभ्यास और अटूट संकल्प से खुद को इतना मजबूत बनाया कि आज वे धैर्य खेलों में प्रेरणा बन चुके हैं। डॉ. जायसवाल अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच संजय बटवे, मेंटर डॉ. अमित समर्थ, फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. नीना साहू, डॉ. सुनीता धोटे, परिवार और समर्थकों को देते हैं।

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