

Nagpur Digital Arrest 87 Lakh Fraud: मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और पुलिस कार्रवाई का डर दिखाकर साइबर ठगों ने नागपुर के 70 वर्षीय सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी से 87 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने खुद को सरकारी अधिकारी और पुलिसकर्मी बताकर पहले बुजुर्ग को डराया, फिर वीडियो कॉल के जरिए उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ करने का झांसा दिया। अलग-अलग कारण बताकर उनसे आरटीजीएस के जरिए कई बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई।
ठगी का पता चलने के बाद पीड़ित ने साइबर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आईटी एक्ट और धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पीड़ित 70 वर्षीय व्यक्ति भगवाननगर क्षेत्र में रहते हैं और सरकारी सेवा में लिपिक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। शिकायत के मुताबिक, 4 अगस्त को उन्हें अमित कुमार चौधरी नामक व्यक्ति ने वाट्सऐप कॉल किया। कॉल करने वाले ने खुद को ‘गवर्नमेंट प्रोटेक्शन बोर्ड ऑफ इंडिया’ का वरिष्ठ अधिकारी बताया।
आरोपी ने बुजुर्ग को बताया कि उनका नाम मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में सामने आया है और उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया है। अचानक इस तरह की जानकारी मिलने से बुजुर्ग घबरा गए।
इसके बाद बुजुर्ग को संदीपराव नाम के व्यक्ति ने फोन किया। उसने खुद को मुंबई के कुलाबा पुलिस थाने का सब-इंस्पेक्टर बताया और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में केस दर्ज होने की बात कही। आरोपियों ने भरोसा बढ़ाने के लिए वाट्सऐप पर एक फर्जी एफआईआर भी भेजी।
इसके बाद ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए बुजुर्ग को बताया कि उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया जा रहा है। उन्हें कथित जांच और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर किसी से संपर्क नहीं करने तथा आरोपियों के निर्देशों का पालन करने के लिए मजबूर किया गया।
आरोपियों ने जांच और अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर बुजुर्ग से अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा करने को कहा। उनके निर्देश पर पीड़ित ने आरटीजीएस के जरिए कुल 87 लाख रुपये विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।
रकम ट्रांसफर होने के बाद आरोपियों ने फोन करना बंद कर दिया। इसके बाद बुजुर्ग ने अपने रिश्तेदारों से बातचीत की। परिजनों ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी लेने के बाद उन्हें साइबर ठगी का शिकार होने की बात बताई।
इसके बाद पीड़ित ने साइबर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले में धोखाधड़ी और सूचना प्रौद्योगिकी कानून की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अब उन बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है, जिनमें रकम ट्रांसफर की गई। साथ ही आरोपियों की पहचान, मोबाइल नंबर, बैंक खातों और ठगी के पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर होने वाली साइबर ठगी को उजागर किया है। ठग आमतौर पर खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को किसी गंभीर अपराध में फंसाने की धमकी देते हैं। इसके बाद वीडियो कॉल पर पूछताछ या गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।
ध्यान रखें: कोई भी वास्तविक पुलिस या सरकारी जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती और न ही जांच के नाम पर निजी बैंक खाते में पैसे जमा कराने को कहती है। ऐसे किसी भी कॉल की स्थिति में तुरंत कॉल काटें, परिवार के सदस्यों को जानकारी दें और संबंधित साइबर पुलिस से संपर्क करें।