भाजपा के भीतर 'विभीषण' कौन? बहुमत नहीं फिर भी मेयर हमारा, मुनगंटीवार ने बताया चंद्रपुर में कब्जे का मूल मंत्र

Sudhir Mungantiwar on Chandrapur Mayor: सुधीर मुनगंटीवार ने पार्टी के भीतर 'भीतरघात' करने वालों को दी चेतावनी। एबी फॉर्म चोरी और कांग्रेस की भूमिका पर बड़ा खुलासा।
BJP clinches Chandrapur Mayor seat despite lacking majority.
सुधीर मुनगंटीवार (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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BJP AB Form Controversy Chandrapur: चंद्रपुर महानगर पालिका में स्पष्ट बहुमत न होने के बावजूद राजनीतिक संवाद और रणनीति के बल पर भाजपा का महापौर चुना गया। ऐसा दावा भाजपा नेता तथा राज्य के पूर्व मंत्री विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने किया। उन्होंने कहा कि जनता की इच्छा और आकांक्षा भाजपा के पक्ष में थी। एबी फॉर्म की चोरी के कारण बहुमत हाथ से गया लेकिन अवसर को सोना करते हुए महापौर भाजपा का ही बनाया।

भाजपा के पास 24, जबकि कांग्रेस के पास 30 सीटें थीं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र चव्हाण और चंद्रशेखर बावनकुले द्वारा जिम्मेदारी दिए जाने के बाद राजेंद्र खांडेकर की पत्नी संगीता खांडेकर के नाम को मंजूरी दी गई। हालांकि पार्टी के ही एक नेता ने प्रदेश के पत्र के बिना दूसरा नाम आगे कर बाधा डालने का प्रयास किया, ऐसा गंभीर आरोप उन्होंने लगाया। उन्होंने “समझदार को इशारा काफी होता है,” कहकर तंज भी कसा।

एबी फॉर्म विवाद पर जांच जारी

उन्होंने कहा कि एबी फॉर्म प्रकरण की जांच पार्टी स्तर पर शुरू है और कोर कमेटी में इस पर चर्चा होगी। प्रदेशाध्यक्ष द्वारा मुख्यमंत्री की अनुमति से दिए गए नाम के विरुद्ध उम्मीदवार कैसे दिया गया, इसकी जांच की जाएगी। महापौर चुनाव के दौरान निर्दलीय तथा उबाठा गुट के संदीप गिरहे सहित विभिन्न सदस्यों से चर्चा हुई।

कांग्रेस नेता राहुल पुगलिया ने भी शहर के विकास के लिए सकारात्मक भूमिका अपनाई। उन्होंने कहा कि ‘हमारा हृदय कांग्रेस का है, लेकिन विकास के लिए साथ।’ सीएम फडणवीस और उद्धव ठाकरे के विषय में उन्होंने कहा कि उनके बीच चर्चा के संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं है।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय स्थानीय स्तर का था। उन्होंने चेतावनी भरे स्वर में कहा कि किंगमेकर फ्लेक्स के संबंध में यह कार्यकर्ताओं का आनंद है, ऐसा कहते हुए अनुशासनहीनता पर उचित समय पर कार्रवाई होगी। संजय राऊत पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि उनके घर में आग लगी और हमारे यहां अगरबत्ती जली।

क्या है फॉर्म विवाद?

महापौर चुनाव प्रक्रिया में एबी फॉर्म अर्थात पार्टी की आधिकारिक उम्मीदवारी का प्रमाणपत्र महत्वपूर्ण होता है। चंद्रपुर में आधिकारिक नाम घोषित होने के बाद भी दूसरा नाम आगे आने से भ्रम की स्थिति बनी। मुनगंटीवार के अनुसार, इससे बहुमत का आंकड़ा प्रभावित हुआ। हालांकि बाद में राजनीतिक चर्चाओं से समीकरण बनाकर भाजपा ने महापौर पद हासिल किया। इस प्रकरण की जांच पार्टी की कोर कमेटी में होगी।

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