सरकारी कामों के आवंटन में आरक्षण नीति को चुनौती, हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से मांगा जवाब

Nagpur News: सरकारी कामों में कथित अनियमितता पर बेरोजगार इंजीनियरों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर 3 सप्ताह में जवाब मांगा।
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बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ व सीएम देवेंद्र फडणवीस (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur News In Hindi: सरकारी कामों के आवंटन में कथित अनियमितता को लेकर अब्दुल रहमान रिजवानी की ओर से बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ में याचिका दायर की गई। याचिका पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के सार्वजनिक निर्माण कार्य विभाग के प्रधान सचिव, गोंदिया जिला परिषद के सीईओ, पीडब्ल्यूडी के कार्यकारी अभियंता और पीडब्ल्यूडी के अधीक्षक अभियंता को नोटिस जारी कर जवाब दायर करने के आदेश दिए।

बेरोजगार इंजीनियरों ने एक टेंडर प्रक्रिया को इस आधार पर चुनौती दी है कि यह केवल श्रमिक सहकारी समितियों के लिए आरक्षित थी जबकि सरकारी नीति के अनुसार इसमें बेरोजगार इंजीनियरों और नियमित ठेकेदारों को भी शामिल किया जाना चाहिए था। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से इनकार तो किया किंतु प्रतिवादियों को 3 सप्ताह के भीतर जवाब दायर करने को कहा।

40 प्रतिशत बेरोजगार इंजीनियरों के लिए आरक्षण

हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने अदालत को बताया कि 19 अक्टूबर, 2011 और 5 अप्रैल, 2023 के सरकारी अधिसूचना के अनुसार सरकारी कामों का वितरण 26:40:34 के अनुपात में होना चाहिए।

इस नीति के तहत 26% काम श्रमिक सहकारी समितियों को, 40% बेरोजगार इंजीनियरों को और शेष 34% काम नियमित ठेकेदारों को दिया जाना चाहिए। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि विचाराधीन टेंडर में केवल एक श्रेणी को आरक्षित कर अन्य दो श्रेणियों को बोली लगाने के अवसर से वंचित कर दिया गया।

सुनवाई के दौरान अदालत ने इस नीति को हर एक काम के टेंडर पर लागू करने की व्यावहारिकता पर सवाल उठाया। अदालत ने कहा कि यदि केवल एक ही काम है तो उसे इस प्रतिशत में बांटना संभव नहीं होगा।

अनुपात में बांटना मुश्किल

कोर्ट ने कहा कि एक से अधिक काम होने पर भी उन्हें संख्या या लागत के आधार पर इस अनुपात में बांटना मुश्किल होगा। याचिकाकर्ताओं के वकील ने भी यह स्वीकार किया कि विचाराधीन कार्यों का इस तरह से वितरण व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है लेकिन उन्होंने तर्क दिया कि अन्य दो श्रेणियों को बाहर करना नोटिस को अवैध बनाता है।

सरकारी वकील ने कहा कि नीति का समग्र रूप से पालन किया जाता है ताकि सभी श्रेणियों को काम मिल सके। उन्होंने दलील दी कि कई बार ई-टेंडर सिर्फ बेरोजगार इंजीनियरों के लिए भी निकाले जाते हैं और उन्हें ड्रॉ के माध्यम से भी काम आवंटित किया जाता है।

याचिकाकर्ता के वकील द्वारा जलगांव जिला मजदूर कामगार सहकारी समिति फेडरेशन लिमिटेड बनाम महाराष्ट्र राज्य के मामले में दिए गए एक अदालती फैसले का हवाला दिए जाने के बाद हाई कोर्ट ने नोटिस जारी किया।

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