नागपुर में आधी रात खूनी तांडव, 7 से 8 हमलावरों ने मिलकर की गुंडे कि निर्मम हत्या

एक कुख्यात गुंडे अजय गाते (31) की करीब 7 से 8 युवकों ने धारदार हथियारों से वार कर और अंत में पत्थर से सिर कुचलकर निर्मम हत्या कर दी।
नागपुर में निर्मम हत्या
नागपुर में निर्मम हत्या (सौजन्यः सोशल मीडिया)
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नागपुर: सोमवार देर रात नागपुर के गोंडवाना चौक में दिल दहला देने वाली वारदात घटी। एक कुख्यात गुंडे अजय गाते (31) की करीब 7 से 8 युवकों ने धारदार हथियारों से वार कर और अंत में पत्थर से सिर कुचलकर निर्मम हत्या कर दी। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। मृतक अजय गाते बैरामजी टाउन का निवासी था। उसके खिलाफ हत्या, नशीले पदार्थों की तस्करी और अन्य कई संगीन अपराध दर्ज थे।

जानकारी के अनुसार, गाते लगभग एक वर्ष पूर्व ही जेल से छूटकर बाहर आया था और पुनः इलाके में अपना वर्चस्व स्थापित करने की कोशिश कर रहा था। अजय बच्चों से जबरन काम करवाता था और उनकी छोटी-छोटी बातों पर मारपीट करता था। कोई भी उसके खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं करता था। सोमवार रात भी उसने कुछ बच्चों को पीटा, जो रोते हुए अखिलेश कंगाली (24) के पास पहुंचे।

निर्मम हत्या, मौके पर मौत

अखिलेश ने दोस्तों अनूप उर्फ करण कनोजिया (20) और मुकेश उर्फ अमन उईके (19) के साथ मिलकर अजय को सबक सिखाने की योजना बनाई। रात करीब 1 बजे अजय गोंडवाना चौक पर बैठा था, तभी तीनों युवक अपने अन्य साथियों के साथ वहां पहुंचे। बातचीत के दौरान विवाद इतना बढ़ गया कि अजय ने चाकू निकाल लिया और अखिलेश पर वार करने ही वाला था कि उसके साथियों ने उस पर हमला बोल दिया। धारदार हथियारों से ताबड़तोड़ वार करने के बाद उसे पत्थर और ईंटों से कुचल डाला, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

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3 आरोपी गिरफ्तार, 4 फरार

सदर पुलिस ने इस मामले में 3 आरोपियों- अखिलेश कंगाली, अनूप कनोजिया और मुकेश उईके को गिरफ्तार कर लिया है। अदालत ने उन्हें 11 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेजा है। अन्य 4 आरोपी करण यादव, अमन यादव, ऋतिक पिल्ले और शिवम गेडाम फिलहाल फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी है। घटना की सूचना मिलते ही सदर थाना प्रभारी मनीष ठाकरे अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे।

कानून व्यवस्था पर सवाल

मृतक के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर, पंचनामा किया गया और हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है। इस वारदात से यह स्पष्ट है कि अपराधियों पर कार्रवाई न होने से समाज में भय और गुस्सा दोनों पनपते हैं। बच्चों को राहत तो मिली, पर शहर में कानून व्यवस्था पर फिर एक बार सवाल उठ खड़े हुए हैं।

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