संदेह कभी सबूत का विकल्प नहीं हो सकता: नागपुर कोर्ट ने हत्याकांड के मामले में आरोपी महिला को किया दोषमुक्त
Nagpur Bhiwapur Murder Case: नागपुर के भिवापुर हत्याकांड में प्रमुख जिला एवं सत्र न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपी बहू को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि केवल संदेह के आधार पर दोष सिद्ध नहीं होता।
- Written By: अंकिता पटेल
भिवापुर हत्याकांड, नागपुर कोर्ट,(साेर्स: नवभारत डिजाइन फोटो )
Nagpur Court Bhiwapur Murder Case: नागपुर जिले के चर्चित भिवापुर हत्याकांड में प्रमुख जिला एवं सत्र न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए हत्या के आरोप में गिरफ्तार 25 वर्षीय रक्षंदा शैलेश पाटिल को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ पारिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी और विश्वसनीय श्रृंखला स्थापित करने में पूरी तरह विफल रहा। ऐसे में केवल संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी रक्षंदा को संदेह का लाभ देते हुए आरोपों से मुक्त कर दिया। बचाव पक्ष की ओर से एडवोकेट रमेश रावलानी और एडवोकेट अतुल रावलानी ने पैरवी की।
क्या था मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार यह घटना 4 जून 2023 को भिवापुर पुलिस थाना क्षेत्र के जिलबोडी गांव में हुई थी। गांव निवासी सिद्धार्थ वक्तू पाटिल अपनी पत्नी हीराबाई, बहू रक्षंदा और छोटी पोती के साथ रहते थे।
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बताया गया कि जब सिद्धार्थ घर लौटे तो उन्होंने अपनी पत्नी हीराबाई को खाट पर खून से लथपथ मृत अवस्था में पाया। घटनास्थल पर खून से सनी एक कुल्हाड़ी भी पड़ी थी। प्रारंभिक जांच में पुलिस को रक्षंदा पर संदेह हुआ, जिसके आधार पर उसे गिरफ्तार कर हत्या का मामला दर्ज किया गया।
बचाव पक्ष ने जांच पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने नागपुर पुलिस जांच में कई गंभीर खामियों की ओर अदालत का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि जांच अधिकारी ने स्वयं स्वीकार किया कि जब्त किए गए कपड़ों को जब्ती से पहले शव के पास खुली अलमारी में रखा गया था। इसके अलावा अभियोजन यह भी साबित नहीं कर पाया कि घटनास्थल से जब्त वस्तुओं को उसी समय विधिवत सील किया गया था।
बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि पुलिस ने जब्त सामान को मालखाने में जमा कराने संबंधी कोई रसीद या दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत नहीं किया, जिससे साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।
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अदालत की टिप्पणी
सभी साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद प्रमुख जिला एवं सत्र न्यायालय ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की ऐसी मजबूत श्रृंखला स्थापित नहीं कर सका, जिससे यह निर्विवाद रूप से सिद्ध हो सके कि हत्या रक्षंदा ने ही की थी।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि “केवल गहरा संदेह कानूनी सबूत का विकल्प नहीं हो सकता।” पर्याप्त और ठोस साक्ष्य के अभाव में आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने रक्षंदा शैलेश पाटिल को बरी करने का आदेश दिया।
