

Asian Championships: कभी हैंडबॉल कोर्ट पर अपनी पहचान बनाने वाले 22 वर्षीय अनिकेत नलवड़े आज भारतीय एथलेटिक्स टीम का हिस्सा बन चुके Nagpur हैं। महज डेढ़ साल पहले उन्होंने कोच की सलाह पर हैंडबॉल छोड़कर 100 मीटर दौड़ को अपनाया था। आज वही फैसला उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ है।
इंडियन ग्रां प्री सीरीज 4 में स्वर्ण पदक जीतने के बाद उनका चयन 4×100 मीटर रिले टीम में एशियन चैम्पियनशिप के लिए हुआ है। किसान परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने की उनकी कहानी संघर्ष, मेहनत और विश्वास की मिसाल है।
अनिकेत बताते हैं कि वह पहले क्रीड़ा प्रबोधिनी में हैंडबॉल खिलाड़ी थे। फिटनेस प्रशिक्षण के दौरान कोच शमशेर खान ने उनकी रफ्तार देखी और एथलेटिक्स में हाथ आजमाने की सलाह दी।
उन्होंने बिना देर किए खेल बदला। शुरुआती प्रतियोगिताओं में अच्छे प्रदर्शन ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। कुछ ही समय में राज्य स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे और अब भारतीय टीम में जगह बना ली।
अनिकेत ने कहा, 'कोच पर भरोसा रखिए, मेहनत कभी मत छोड़िए, धैर्य रखिए। अगर समर्पण होगा तो परिणाम देर से ही सही लेकिन जरूर मिलेगा। मेरा सपना अब ओलम्पिक में भारत के लिए पदक जीतना है।"
अनिकेत अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपने कोच शमशेर खान, एथलेटिक्स कोच अरुणा गंधे और क्रीड़ा प्रबोधिनी के पूरे स्टाफ को देते हैं। वह बताते हैं कि ट्रायल से पहले उनके पास स्पाइक्स तक नहीं थे।
जिला खेल अधिकारी व प्रबोधिनी की प्राचार्य पल्लवी धात्रक ने उनकी जरूरत समझी और 2 दिनों के भीतर सिटी के बाहर से नए स्पाइक्स उपलब्ध करा दिए, उन्हीं स्पाइक्स के साथ उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और भारतीय टीम के लिए क्वालिफाई कर लिया। उनके अनुसार समय पर मिला यह सहयोग उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।
मूलतः सांगली जिले के किसान परिवार से आने वाले अनिकेत कहते हैं कि परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं है। करीब 4 साल पहले वह ट्रायल्स देकर यहां पहुंचे। यदि सरकारी क्रीड़ा प्रबोधिनी का सहयोग नहीं मिलता तो अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना मुश्किल था।
अकादमी में रहने, खाने, ट्रेनिंग, पोषण और प्रतियोगिताओं में यात्रा की सुविधा ने उन्हें केवल खेल पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर दिया। यही वजह है कि वह आज देश के लिए दौड़ने का सपना साकार कर पा रहे हैं। उनकी दिनचर्या भी किसी प्रोफेशनल एथलीट से कम नहीं है।
रोजाना 4 से 5 घंटे अभ्यास, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, रिकवरी और संतुलित आहार उनकी तैयारी का हिस्सा है। ड्राई फ्रूट्स, फल और पौष्टिक भोजन के साथ वह अपनी फिटनेस को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। उनका मानना है कि सप्रिंटर के लिए हर सेकंड और हर अभ्यास मायने रखता है।
9 से 12 जुलाई तक चीन में होने वाली एशियन चैम्पियनशिप में भारतीय 4×100 मीटर रिले टीम का हिस्सा बनने को लेकर अनिकेत बेहद उत्साहित है। उनका कहना है कि भारत की जर्सी पहनकर ट्रैक पर उतरना हर खिलाड़ी का सपना होता है और वह इस अवसर को यादगार
बनाने के लिए लगातार मेहनत कर रहे है, रोजाना सुबह 2 से 3 घंटे और शाम में भी इतना ही समय ट्रैक पर देते हैं। इसके अलावा स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और रिकवरी पर भी ध्यान देता हूं, ताकि यह देश के लिए पदक जीत सके। उनका अंतिम लक्ष्य ओलम्पिक में देश के लिए पदक जीतना है।
-नवभारत लाइव के लिए नागपुर से जयदीप रघुवंशी की रिपोर्ट