

Nagpur E Challan Controversy: नागपुर जिले में ट्रैफिक नियमों के पालन को लेकर शहर में इन दिनों सख्ती जारी है। रेड सिग्नल जम्प करते ही ई-चालान ठोक दिया जाता है। एआई लैस सीसीटीवी कैमरों से नजर रखी जा रही है। ट्रैफिक पुलिसकर्मी भी धड़ाधड़ चालान बना रहे हैं लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन स्टॉप लाइनों का पालन कराने के लिए चालान काटे जा रहे हैं, वे आखिर सड़क पर हैं कहां? विडंबना यह है कि ट्रैफिक नियमों का डंडा तो आम वाहन चालक पर चल रहा है लेकिन उन्हीं नियमों की बुनियाद यानी स्टॉप लाइन, जेब्रा क्रॉसिंग, लेन मार्किंग और सिग्नल टाइमर आदि को सही बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाने में प्रशासन खुद ही फिसड्डी साबित हो रहा है। शहर के कई प्रमुख चौराहों पर सफेद पट्टियां महीनों से धुंधली हैं। कई जगह पूरी तरह मिट चुकी हैं लेकिन कैमरे पहले की तरह चालू हैं और चालान भी लगातार जारी हैं। टाइमर काम नहीं कर रहे।
ट्रैफिक पुलिस वाहन चालकों से नियमों के अक्षरशः पालन की अपेक्षा करती है लेकिन सड़क पर जरूरी संकेतों को दुरुस्त रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। नागपुर में करोड़ों रुपये सड़क विकास, स्मार्ट सिटी और इंटेलिजेंट ट्रैफिक सिस्टम पर खर्च हुए लेकिन स्टॉप लाइन की कुछ मीटर सफेद पट्टी समय पर नहीं बन पाई।
यानी जमीन से ऊपर खंभों पर आधुनिक सिग्नल, कैमरे और लाइटें आदि लगा दी गई लेकिन जमीन पर स्टॉप लाइन, जेब्रा क्रॉसिंग का खर्च बचा लिया गया। सवाल यह है कि क्या नियम सिर्फ जनता के लिए हैं?
समाजसेवी नरेन्द्र सतीजा ने कहा कि नियमों का पालन करने में किसी को आपत्ति नहीं है, लेकिन सड़क पर संकेत ही नहीं दिखेंगे तो वाहन कहां रोका जाए? यदि कैमरे गलती पकड सकते हैं तो संबंधित विभागों की लापरवाही क्यों नहीं पकड़ते? सड़क पर संकेतों का अभाव चालक और पैदल चलने वाले, दोनों के लिए खतरा बन चुका है।
ज्ञात हो कि हर वर्ष सड़क मरम्मत, डामरीकरण और सौंदर्याकरण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन स्टॉप लाइन और जेब्रा क्रॉसिंग जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं उपेक्षा का शिकार हैं।
बारिश के बाद अधिकांश चौराहों पर रोड मार्किंग गायब हो जाती है और महीनों तक दोबारा नहीं बनाई जाती। यातायात विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क सुरक्षा केवल जुर्माने से नहीं आती।
स्पष्ट रोड मार्किंग, रिफ्लेक्टिव थर्मोप्लास्टिक पेंट, लेन संकेत और नियमित ऑडिट उतने ही जरूरी हैं। जब सड़क ही चालक को सही जगह नहीं बताएगी तो केवल चालान से अनुशासन नहीं आएगा।
ट्रैफिक नियम दोतरफा जिम्मेदारी हैं। एक ओर वाहन चालक नियमों का पालन करें, तो दूसरी ओर प्रशासन सड़क पर मानक संकेत उपलब्ध कराए। यदि स्टॉप लाइन मिट चुकी है और जेब्रा क्रॉसिंग गायब है, तो केवल चालान काटना व्यवस्था नहीं, बल्कि एकतरफा कार्रवाई माना जाएगा। पहले सड़कों को नियमों के अनुरूप बनाइए, फिर जनता से नियम पालन की अपेक्षा कीजिए।