

अकोला: महाराष्ट्र में इस साल के अंत में विधानसभा के चुनाव होने है, 288 विधानसभा सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर पूरे देश की सियासत में जबरदस्त गर्माहट है। महाराष्ट्र चुनाव की बात करें तो हमेशा से ही यहां एक अलग प्रकार की खलबली रहती है उलटफेर चलती रहती है, खैर अभी हम महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनाव की बात करते है।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में प्रत्येक सीट का अपना प्रभाव है, लेकिन मुर्तिजापुर विधानसभा सीट का एक अलग इतिहास रहा है, जिस सीट पर अभी वर्तमान में बीजेपी ने अपना कब्जा जमा रखा है हां वो अलग बात है कि जब मुर्तिजापुर विधानसभा सीट का निर्माण हुआ तब से उसे कांग्रेस का गढ़ कहा जाता था, लेकिन भईया ये राजनीति है यहां तो कब सवेरा और कब शाम होता इसका कोई अंदाजा लगाना कठिन है।
शुरुआत से बात करें तो मुर्तिजापुर विधानसभा सीट की शुरुआत 1952 में हुआ, जहां हुए पहले चुनाव में कांग्रेस के श्यामराव धियोत्रे ने जीत दर्ज की थी। 1957 में कांग्रेस की कुसुम कोरपे ने जीत दर्ज की थी। इसके अलावा कांग्रेस के दगड़ू भी चुने गए थे। जिसके बाद अब बात अगर मुर्तिजापुर विधानसभा सीट पर 2014 में हुए चुनाव की बात करें तो भारतीय जनता पार्टी के हरीश मारोतिअप्पा पिंपले ने जीत दर्ज की। इसके अलावा 2004 में एनसीपी के विधायक ने इस सीट पर कब्जा किया था। तुकाराम ने बीजेपी के रावसाहेब को हराया था।
मुर्तिजापुर विधानसभा सीट की बात करें तो महाराष्ट्र की 288 सीटों में ये भी एक अहल सीट मानी जाती है। अभी ये सीट अनुसूचित जाति -एससी उम्मीदवारों के लिए आरक्षित है। जहां अपनी चुनावी दादेवारी के लिए सभी राजनीतिक पार्टियां अपनी अपनी तैयारी में लगी हुई है। इस साल होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मुर्तिजापुर विधानसभा सीट की बाते तेज है, लेकिन इतने हथकंडे अपनाने के बाद भी कांग्रेस या फिर अन्य पार्टी अभी तक यहां अपनी दावेदारी साबित करने में असफल लग रही है।
इस सीट को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ही अभी तक प्रबल दावेदार मानी जा रही है, जिसके बाद देखने वाली बात ये है कि आखिर इस बार के चुनाव में कांग्रेस अपना कोई मास्टर स्ट्रोक खेलने वाली है या फिर तीसरी बार बीजेपी बाजी मार जाएगी।