युवासेना में हार- जीत का खेल: एकनाथ शिंदे के खास को मंच से रखा दूर, शिंदे गुट में बढ़ा आंतरिक कलह

Yuvasena Internal Dispute: मुंबई के महायुवोत्सव में अमेय घोले को दरकिनार किए जाने से युवासेना में दरार की खबरें। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के करीबी नेता को नहीं मिली मंच पर जगह। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
The Game of Wins and Losses in the Yuva Sena: Eknath Shinde's Close Aide Kept Off the Dais; Internal Strife Intensifies Within the Shinde Faction.
एकनाथ शिंदे व श्रीकांत शिंदे (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Yuvasena Internal Dispute News: मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के युवा संगठन 'युवासेना' में चल रही अंतर्कलह अब सार्वजनिक हो चुकी है। शनिवार को मुंबई के वरली में आयोजित राज्यव्यापी 'महायुवोत्सव' कार्यक्रम के दौरान यह विवाद उस समय गहरा गया, जब युवासेना के महासचिव और अनुभवी नेता अमेय घोले को मंच पर जगह नहीं दी गई। राज्यभर से आए पदाधिकारियों की मौजूदगी में अमेय घोले जैसे कद्दावर नेता को दरकिनार किए जाने के बाद पार्टी के भीतर गुटबाजी और असंतोष की खबरें तेज हो गई हैं।

मंच पर सचिवों की एंट्री, पर महासचिव गायब

हैरानी की बात यह रही कि कार्यक्रम के दौरान युवासेना के लगभग सभी सचिवों को सम्मान के साथ मंच पर आमंत्रित किया गया, लेकिन महासचिव पद पर होने के बावजूद अमेय घोले पूरे समय दर्शकों के बीच बैठे नजर आए। घोले केवल एक पदाधिकारी नहीं हैं, बल्कि मुंबई महानगरपालिका में शिवसेना के गटनेता (Floor Leader) भी रह चुके हैं और तीन बार के पार्षद के रूप में उनका गहरा अनुभव है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खास लोगों में शुमार होने के बावजूद उन्हें इस तरह 'डाउनग्रेड' किया जाना पार्टी के भीतर चल रहे शक्ति परीक्षण का संकेत माना जा रहा है।

कौन हैं अमेय घोले? क्यों हैं वे अहम?

अमेय घोले मुंबई की राजनीति का एक बड़ा चेहरा हैं। बीएमसी (BMC) में शिवसेना के गुटनेता के रूप में उन्होंने लंबे समय तक पार्टी की कमान संभाली है। उनका जनसंपर्क बेहद मजबूत माना जाता है और इसी काबिलियत के कारण एकनाथ शिंदे ने उन पर बड़ा भरोसा जताते हुए अहम जिम्मेदारियां सौंपी थीं। हालांकि, अब युवासेना के भीतर ही कुछ अन्य गुटों द्वारा उन्हें हाशिए पर धकेलने की कोशिश की जा रही है, जिससे कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है।

कैबिनेट विस्तार और विधायकों का असंतोष

नाराजगी का यह सिलसिला केवल युवासेना तक सीमित नहीं है। हाल ही में सोलापुर और धाराशिव के शिवसैनिकों ने अपने ही विधायकों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। इसके अलावा, शिवसेना के कई विधायक कुछ मौजूदा मंत्रियों की कार्यशैली और व्यवहार से नाखुश हैं। सूत्रों के अनुसार, विधायकों ने अपनी शिकायतें पक्ष प्रमुख (एकनाथ शिंदे) तक पहुँचा दी हैं। चर्चा यह भी है कि आगामी मंत्रिमंडल विस्तार में कुछ पुराने मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है और उनकी जगह नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है, ताकि पार्टी के भीतर बढ़ रहे इस 'नाराजी के वायरस' को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।

नेतृत्व की चुप्पी और भविष्य की चुनौती

अमेय घोले के साथ हुए इस व्यवहार पर फिलहाल मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे या सांसद श्रीकांत शिंदे की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि युवासेना और शिवसेना के भीतर के इस असंतोष को जल्द नहीं सुलझाया गया, तो आने वाले नगर निगम और विधानसभा चुनावों में पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। फिलहाल, 'महायुवोत्सव' का यह मंच चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है और अमेय घोले के समर्थक इसे अपने नेता का अपमान मान रहे हैं।

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