पश्चिम रेलवे की नई तैयारी: चर्चगेट-विरार लोकल में 40 अधिकृत फेरीवालों की योजना, अवैध वेंडरों पर शिकंजा

Mumbai Train News: पश्चिम रेलवे चर्चगेट-विरार लोकल ट्रेनों में 40 अधिकृत फेरीवाले तैनात करने की योजना बना रहा है। इससे अवैध विक्रेताओं पर लगाम लगेगी और यात्रियों को सुरक्षा मिलेगी।
Western Railway plans to deploy 40 authorized non-catering vendors in Churchgate-Virar local trains to curb unauthorized hawking and generate additional revenue.
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Western Railway Authorized Vendors: पश्चिम रेलवे चर्चगेट-विरार उपनगरीय रेल मार्ग पर लोकल ट्रेनों में अवैध फेरीवालों की समस्या से निपटने के लिए नई व्यवस्था पर विचार कर रही है। प्रस्तावित योजना के तहत 40 अधिकृत गैर-खाद्य (नॉन-कैटरिंग) विक्रेताओं को पहचान-पत्र और लाइसेंस जारी कर ट्रेनों में सामान बेचने की अनुमति दी जा सकती है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इससे अधिकृत और अवैध विक्रेताओं के बीच स्पष्ट अंतर होगा तथा अवैध फेरीवालों के खिलाफ कार्रवाई अधिक प्रभावी बन सकेगी।

गैर-खाद्य वस्तुओं की बिक्री की होगी अनुमति

प्रस्तावित योजना के अनुसार, अधिकृत विक्रेताओं को पेन, रुमाल, पत्रिकाएं, मोबाइल एक्सेसरीज, खिलौने और अन्य गैर-खाद्य वस्तुएं बेचने की अनुमति मिलेगी। रेलवे का अनुमान है कि इस व्यवस्था से हर वर्ष करीब 25 से 27 लाख रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, चर्चगेट-विरार मार्ग पर प्रतिदिन औसतन 20 से 25 अवैध फेरीवालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।

मध्य रेलवे की तर्ज पर पहल

यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब मध्य रेलवे ने लोकल ट्रेनों में 100 अधिकृत फेरीवालों को अनुमति देने का फैसला किया है। इसके बाद पश्चिम रेलवे भी इसी तरह की व्यवस्था लागू करने की संभावना पर विचार कर रही है। हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर कुछ यात्री संगठनों ने आश्चर्य जताया है और भीड़भाड़ वाली लोकल ट्रेनों में इसके असर को लेकर सवाल उठाए हैं।

रेलवे ने कहा- अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं

इस बीच पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विनीत अभिषेक ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल अधिकृत नॉन-कैटरिंग विक्रेताओं की नियुक्ति को लेकर कोई औपचारिक योजना या अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर अभी विचार-विमर्श जारी है और किसी भी प्रस्ताव को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। इसलिए फिलहाल इसे प्रस्तावित योजना के रूप में ही देखा जाना चाहिए।