रोजगार भी, सेहत भी! महाराष्ट्र में स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के लिए बनेंगे वेंडिंग ज़ोन, तुकाराम मुंढे का ऐलान

FDA Vending Zone Rules: तुकाराम मुंढे ने ऐलान किया है कि खाद्य सुरक्षा के नाम पर स्ट्रीट फूड विक्रेताओं की आजीविका प्रभावित नहीं होगी। शहरों में उनके लिए डेजिग्नेटेड वेंडिंग ज़ोन बनाए जाएंगे।
tukaram munde announces vending zones for street food vendors in maharashtra
तुकाराम मुंढे(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Tukaram Munde Announces Vending Zones For Street Food: महाराष्ट्र FDA के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट किया है कि खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता मानकों को सुधारने के नाम पर छोटे स्ट्रीट फूड विक्रेताओं की आजीविका को प्रभावित नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य किसी भी व्यापार को बंद करना नहीं, बल्कि उसे बढ़ावा देना है।

हालांकि, व्यापार और रोजगार को प्रोत्साहन देते समय नागरिकों के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। सरकार और प्रशासन की प्राथमिकता व्यवसाय, समृद्ध स्ट्रीट फूड संस्कृति और जन-स्वास्थ्य के बीच एक मजबूत व टिकाऊ संतुलन स्थापित करना है।

खाऊ गली मॉडल और डेजिग्नेटेड वेंडिंग जोन्स

तुकाराम मुंढे ने बताया कि शहरों में स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के लिए समर्पित डेजिग्नेटेड वेंडिंग जोन्स तैयार किए जाने चाहिए। उन्होंने मुंबई की प्रसिद्ध चौपाटी और 'खाऊ गलियों' का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार सब्जी मंडियों के लिए स्थान निर्धारित होते हैं, उसी प्रकार स्ट्रीट फूड के लिए भी सुरक्षित स्थान बनाए जा सकते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि फुटपाथ मूल रूप से पैदल चलने वाले यात्रियों के लिए होते हैं। इसलिए, वेंडिंग क्षेत्रों का उचित नियोजन होना आवश्यक है ताकि सार्वजनिक रास्तों पर बाधा न पहुंचे और वेंडरों की आजीविका भी सुरक्षित रहे।

स्थानीय निकायों और FDA का साझा ढांचा

इस नई व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने के लिए स्थानीय निकायों और खाद्य एवं औषधि प्रशासन के बीच एक समन्वित ढांचा तैयार किया जाएगा। स्थानीय प्रशासन वेंडिंग क्षेत्रों की पहचान, आवंटन और अनधिकृत वेंडिंग पर नियंत्रण का काम संभालेंगे।

दूसरी ओर, एफडीए विक्रेताओं के पंजीकरण, लाइसेंसिंग, नियमित निरीक्षण, सैंपलिंग और खाद्य सुरक्षा मानकों का प्रवर्तन सुनिश्चित करेगा। मौजूदा विक्रेताओं को इन निर्धारित स्थानों पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया चरणबद्ध और सुव्यवस्थित तरीके से पूरी की जाएगी।

स्वास्थ्य और आजीविका, एक ही सिक्के के दो पहलू

तुकाराम मुंढे का मानना है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और आजीविका दो अलग या परस्पर विरोधी विषय नहीं हैं। ये दोनों एक ही प्रशासनिक व्यवस्था की दो महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं।

एक बेहतर सुशासन का लक्ष्य किसी एक पक्ष को चुनने के बजाय एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है, जहां विक्रेताओं को टिकाऊ आजीविका मिले, खाद्य संस्कृति समृद्ध हो और उपभोक्ताओं को स्वच्छ व सुरक्षित भोजन की गारंटी मिल सके।

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