महाराष्ट्र पुलिस भर्ती में बड़ा चमत्कार या घोटाला? निजी क्लास के पेपर से आए 85 सवाल, सुप्रिया सुले ने उठाए सव

SRPF Exam Controversy: सांसद सुप्रिया सुले ने महाराष्ट्र पुलिस भर्ती परीक्षा में निजी कोचिंग के पेपर से 85 सवाल आने पर चिंता जताई। उन्होंने सरकार से उच्च स्तरीय जाँच की मांग की है।
Miracle or scam in Maharashtra police recruitment? 85 questions appeared in the private class exam, and Supriya Sule raised questions.
सुप्रिया सुले (एआई फोटो)
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SRPF Exam Paper Leak: महाराष्ट्र राज्य आरक्षित पुलिस बल (SRPF) की हालिया भर्ती परीक्षा विवादों के घेरे में आ गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SCP) की सांसद सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो का हवाला देते हुए परीक्षा की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सुले ने सरकार से इस पूरे मामले की गहन जाँच करने का पुरजोर आग्रह किया है।

निजी कोचिंग और सरकारी पेपर में अजीब समानता

सांसद सुप्रिया सुले ने एक ट्वीट के माध्यम से बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'टेलीग्राम' पर एक निजी कोचिंग क्लास द्वारा साझा किए गए सैंपल पेपर और वास्तविक SRPF परीक्षा के प्रश्नपत्र में चौंकाने वाली समानता देखी गई है। सुले ने कहा, दावा किया जा रहा है कि निजी कोचिंग के सैंपल पेपर से 85 सवाल सीधे तौर पर मुख्य परीक्षा में आए हैं। यदि यह वीडियो और दावा सच है, तो यह अत्यंत चिंताजनक और संदिग्ध है।

एक-दो नहीं, 85 सवालों का आना महज इत्तेफाक नहीं

सुप्रिया सुले ने परीक्षा प्रणाली पर तंज कसते हुए इसे एक चमत्कार बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी निजी क्लास के पेपर से एक या दो सवालों का आना सामान्य हो सकता है, लेकिन 85 सवालों का हूबहू (verbatim) मिल जाना पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि इससे उन लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है जो सरकारी नौकरी के लिए अपने जीवन के कीमती साल समर्पित कर देते हैं और दिन-रात मेहनत करते हैं।

जाँच की मांग और छात्रों का भविष्य

छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए सुप्रिया सुले ने महाराष्ट्र सरकार से अपील की है कि इस मामले की तुरंत और गहन जाँच कराई जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकारी परीक्षाओं का निष्पक्ष और संदेह से मुक्त होना अनिवार्य है ताकि युवाओं का व्यवस्था पर भरोसा बना रहे। यदि परीक्षा की विश्वसनीयता पर आंच आती है, तो यह राज्य के उन होनहार युवाओं के साथ अन्याय होगा जो पूरी ईमानदारी से तैयारी करते हैं।

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