उपमुख्यमंत्री पद के इस्तेमाल को वकील ने बताया असंवैधानिक, राज्यपाल को भेजा दूसरा शिकायती पत्र

Sunetra Pawar Oath Controversy: महाराष्ट्र की नवनियुक्त उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के शपथ ग्रहण को वर्धा के एक वकील ने असंवैधानिक बताते हुए राज्यपाल से शिकायत की है। पढ़ें पूरा मामला।
Lawyer Terms Use of Deputy Chief Minister Post Unconstitutional; Sends Second Complaint Letter to Governor
सुनेत्रा पवार (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Deputy CM Oath Challenged: बारामती विमान दुर्घटना में पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के असामयिक निधन के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में संगठनात्मक और राजनीतिक बदलावों का दौर जारी है। अजित पवार के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने पार्टी की कमान अपने हाथों में ली और इसके तुरंत बाद उन्हें राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया। हालांकि, अब उनकी इस नियुक्ति और शपथ ग्रहण समारोह को लेकर एक बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। वर्धा के एक वकील ने सुनेत्रा पवार के पद को असंवैधानिक बताते हुए राज्यपाल से उनकी नियुक्ति रद्द करने की मांग की है।

क्या है पूरा विवाद और वकील की आपत्ति?

सुनेत्रा पवार ने इसी वर्ष 31 जनवरी को राजभवन में आयोजित एक समारोह में उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, जहां राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई थी। इस शपथ ग्रहण के ठीक चार दिनों के भीतर, वर्धा के अधिवक्ता हर्षवर्धन शोभा बाबाराव गोडघाटे ने इसके खिलाफ राज्यपाल को पहला पत्र लिखा था। अब इस शिकायत पर 103 दिन बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई न होने पर, वकील ने राजभवन को एक नया और दूसरा शिकायती पत्र भेजकर इस मुद्दे को दोबारा गरमा दिया है।

संविधान के उल्लंघन का गंभीर आरोप

अधिवक्ता हर्षवर्धन गोडघाटे ने अपनी शिकायत में भारतीय संविधान के नियमों को आधार बनाया है। उनके अनुसार, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 में केवल राज्य के मुख्यमंत्री और अन्य कैबिनेट मंत्रियों की नियुक्ति और उनकी शपथ का स्पष्ट प्रावधान है। पूरे संविधान में उपमुख्यमंत्री नामक किसी भी पद का कोई वैधानिक उल्लेख नहीं है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि सुनेत्रा पवार ने आधिकारिक शपथ लेते समय दो बार उपमुख्यमंत्री शब्द का उच्चारण किया। संवैधानिक नियमों के तहत यह पूरी तरह अवैध है और इसे संविधान का खुला उल्लंघन माना जाना चाहिए।

राज्यपाल कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल

अपनी नई शिकायत में अधिवक्ता ने केवल सुनेत्रा पवार के पद को ही चुनौती नहीं दी है, बल्कि राजभवन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने महाराष्ट्र सामान्य प्रशासन विभाग के 18 जनवरी 2013 के एक परिपत्र (Circular) का हवाला दिया है। इस परिपत्र के अनुसार, शासकीय कार्यालयों या राजभवन में प्राप्त होने वाले किसी भी जनहित निवेदन या शिकायत पर 12 सप्ताह (84 दिन) के भीतर उचित कार्रवाई करना अनिवार्य होता है।

वकील का कहना है कि उनकी पहली शिकायत पिछले 103 दिनों से राज्यपाल कार्यालय में लंबित पड़ी है, जो स्थापित प्रशासनिक नियमों और कानून की स्पष्ट अवहेलना है। उन्होंने राज्यपाल से इस मामले पर तत्काल संज्ञान लेते हुए सुनेत्रा पवार के खिलाफ उचित कानूनी कदम उठाने का आग्रह किया है। इस नए घटनाक्रम के बाद, महाराष्ट्र के राजनीतिक हलकों में इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि क्या सुनेत्रा पवार को अपनी कुर्सी बचाने के लिए किसी कानूनी लड़ाई का सामना करना पड़ सकता है।

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