मेरी हार के लिए जिम्मेदार…चंद्रकांत खैरे ने अपने सहयोगी पर लगाया आरोप, उद्धव ठाकरे से कर दी शिकायत, अब होगा फैसला!
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में शिवसेना यूबीटी में आए दिन हलचल होती नजर आ रही है। अब उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना यूबीटी के नेता ने अपनी ही हार का जिम्मा अपने ही सहयोगी पर मढ़ दिया है।
- Written By: प्रिया जैस
चंद्रकांत खैरे (सौजन्य-सोशल मीडिया)
मुंबई: महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान राज्य की राजनीति में बड़े-बड़े बदलाव देखने को मिले है। अब चुनाव में अपनी हार के लिए शिवसेना यूबीटी नेता ने अपने ही सहयोगी पर आरोप लगा दिया है। शिवसेना यूबीटी नेता और पूर्व सांसद चंद्रकांत खैरे ने सोमवार को अपने पार्टी सहयोगी अंबादास दानवे पर निशाना साधा और पिछले साल महाराष्ट्र की औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) लोकसभा सीट से हार के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया।
चंद्रकांत खैरे ने बिना विस्तृत जानकारी दिए आरोप लगाया कि पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं का मानना है कि महाराष्ट्र विधान परिषद में विपक्ष के नेता दानवे ने “समझौते” किये। मराठवाड़ा क्षेत्र के वरिष्ठ नेता ने कहा कि उन्होंने शिवसेना यूबीटी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) अंबादास दानवे के खिलाफ शिकायत की है।
उद्धव ठाकरे से की शिकायत
चंद्रकांत खैरे ने कहा, “वह (दानवे) लोकसभा चुनाव में मेरी हार के लिए जिम्मेदार हैं। शिवसैनिकों को लगता है कि वह समझौता करते हैं। मैंने उद्धव (ठाकरे) जी से दो बार शिकायत की है। उन्हें (ठाकरे को) इस पर कुछ निर्णय लेने होंगे।”
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लोकसभा में औरंगाबाद का चार बार प्रतिनिधित्व करने वाले पूर्व सांसद ने कहा कि उन्होंने मध्य महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में शिवसेना को खड़ा करने के लिए कड़ी मेहनत की और यहां तक कि जेल भी गए। उन्होंने दावा किया कि अप्रैल-मई 2024 में हुए लोकसभा चुनावों के दौरान उनसे सलाह लिए बिना टिकट बांटे गए और छह महीने बाद हुए विधानसभा चुनावों में छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) जिले में पार्टी का एक भी उम्मीदवार नहीं जीता।
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खैरे कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र – अंबादास दानवे
छत्रपति संभाजीनगर जिले में छह विधानसभा क्षेत्र हैं। चंद्रकांत खैरे ने कहा, “मुझे विश्वास है कि पार्टी नेतृत्व (दानवे के खिलाफ) कार्रवाई करेगा।” खैरे की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए दानवे ने कहा कि पूर्व सांसद वरिष्ठ नेता हैं और वह कोई भी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र हैं।
छत्रपति संभाजीनगर से शिवसेना यूबीटी के दो वरिष्ठ नेताओं के बीच विवाद विपक्षी पार्टी के लिए अच्छा संकेत नहीं है। मराठवाड़ा का प्रवेशद्वार माना जाने वाला यह जिला कभी अविभाजित शिवसेना का गढ़ हुआ करता था। हालांकि, खैरे दो बार – 2019 और 2024 में लोकसभा सीट हार गए।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
