कमल को फंड और मशाल को दंड? नितेश राणे के बयान पर ठाकरे गुट का पलटवार, राज्यपाल से की कार्रवाई की मांग

Shiv Sena UBT on Nitesh Rane: नितेश राणे के 'फंड वितरण' वाले बयान पर शिवसेना (UBT) ने तीखा पलटवार किया है। अखिल चित्रे ने कहा कि सरकारी खजाना किसी की निजी पिगी बैंक नहीं है।
Shiv Sena UBT on Nitesh Rane
Shiv Sena UBT on Nitesh Rane (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
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Nitesh Rane Controversy: महाराष्ट्र में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों की आहट के साथ ही राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर निचले स्तर तक पहुंच गया है। ताजा विवाद भारतीय जनता पार्टी के नेता और मंत्री नितेश राणे के एक कथित बयान को लेकर शुरू हुआ है। नितेश राणे ने कणकवली के फोंडा निर्वाचन क्षेत्र में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सरकारी निधि का आवंटन राजनीतिक चिह्नों के आधार पर किया जाएगा। उनके इस बयान ने न केवल विपक्ष को आक्रोशित कर दिया है, बल्कि सरकारी तंत्र की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शिवसेना (UBT) ने नितेश राणे के इस बयान को लोकतंत्र का अपमान बताते हुए उन पर जोरदार हमला बोला है। ठाकरे गुट के नेता अखिल चित्रे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर राणे को 'टिल्लू' संबोधित करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी खजाना जनता की मेहनत की कमाई है और इसे किसी एक पार्टी या राजनीतिक निष्ठा के आधार पर नहीं बांटा जा सकता। इस विवाद ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया संवैधानिक संकट पैदा करने की स्थिति बना दी है।

सरकारी तिजोरी अपनी 'पिगी बैंक' नहीं

अखिल चित्रे ने अपनी पोस्ट में नितेश राणे को आड़े हाथों लेते हुए लिखा, "अरे टिल्लू, सरकारी तिजोरी में जमा पैसा जनता का है। सरकारी खजाना तुम्हारी निजी पिगी बैंक नहीं है।" उन्होंने आगे कहा कि सरकारी फंड एक सार्वजनिक संपत्ति है, जिसे पक्ष, चिह्न या किसी की वफादारी देखकर वितरित नहीं किया जा सकता। चित्रे ने तंज कसते हुए कहा कि यह बात केवल उन्हीं को समझ आ सकती है जिनकी बुद्धि का स्तर 'टिल्लू लेवल' से ऊपर हो। उनके अनुसार, फंड के नाम पर सौदेबाजी करना जनता के साथ धोखा है।

लोकतांत्रिक शपथ का उल्लंघन और पक्षपात

ठाकरे गुट ने आरोप लगाया कि नितेश राणे का यह रवैया लोकप्रतिनिधि के रूप में ली गई शपथ का सीधा उल्लंघन है। अखिल चित्रे ने कहा कि जब कोई मंत्री पद की शपथ लेता है, तो वह संविधान के अनुसार बिना किसी भेदभाव और पक्षपात के काम करने का संकल्प लेता है। लेकिन राणे का "हमारा चिह्न तो पैसा, वरना सजा" वाला बयान सत्ता के दुरुपयोग और तानाशाही का खुला कबूलनामा है। यह व्यवहार न केवल असंवैधानिक है, बल्कि कानूनी दृष्टि से भी पूरी तरह गलत है।

राज्यपाल और मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग

इस मामले को लेकर शिवसेना (UBT) ने अब राज्यपाल और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को भी कटघरे में खड़ा किया है। चित्रे ने सवाल पूछा कि क्या राज्यपाल महोदय और मुख्यमंत्री महोदय ऐसे मंत्री पर कार्रवाई करेंगे जो सरकारी फंड के लिए ब्लैकमेलिंग और सौदेबाजी कर रहा है? उन्होंने पूछा कि क्या सत्ता में बैठे शीर्ष पद इन बयानों को मूक सहमति दे रहे हैं? ठाकरे गुट का कहना है कि अगर इस तरह की धमकी भरी राजनीति पर लगाम नहीं लगाई गई, तो यह लोकतंत्र के लिए एक खतरनाक मिसाल बन जाएगी।

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