

Prakash Mahajan On Asaduddin Owaisi: मुंबई के मेयर की कुर्सी को लेकर शुरू हुई जुबानी जंग अब बुर्के और इस्लामी संस्कृति की व्याख्या तक पहुंच गई है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के 'बुर्का पहनने वाली मेयर' के बयान पर शिवसेना नेता प्रकाश महाजन ने कड़ा पलटवार करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित और पहचान के लिए खतरा बताया है।
शिवसेना नेता प्रकाश महाजन ने ओवैसी के दावों की धज्जियां उड़ाईं। उन्होंने सवाल किया कि ओवैसी आखिर किस तरह के इस्लाम की बात कर रहे हैं? महाजन ने तर्क दिया कि दुनिया के कई बड़े मुस्लिम देशों में बुर्का अनिवार्य नहीं है, तो फिर भारत में इसे कट्टरता से क्यों जोड़ा जा रहा है।
प्रकाश महाजन ने अपने तर्क को पुख्ता करने के लिए अंतरराष्ट्रीय उदाहरण पेश किए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जॉर्डन यात्रा के दौरान सबने देखा कि वहां के राजा, जो सीधे पैगंबर के परिवार से ताल्लुक रखते हैं, उनकी पत्नी कभी बुर्का नहीं पहनतीं। महाजन ने आगे कहा कि इंडोनेशिया जैसे सबसे बड़े मुस्लिम आबादी वाले देश और आधुनिक तुर्की में भी महिलाएं आमतौर पर बुर्का नहीं पहनतीं। उन्होंने पूछा कि जब इन देशों में यह संस्कृति नहीं है, तो भारत में इसे बढ़ावा क्यों दिया जा रहा है?
पहचान के संकट का मुद्दा उठाते हुए महाजन ने कहा कि अगर कोई बुर्का पहनकर मेयर की कुर्सी पर बैठता है, तो यह पहचानना मुश्किल होगा कि बुर्के के पीछे असल में कौन है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सार्वजनिक पदों पर पारदर्शिता अनिवार्य होनी चाहिए।
अपने बयान को और तीखा बनाते हुए महाजन ने पाकिस्तान से जुड़ा एक पुराना किस्सा साझा किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में एक मजाक मशहूर था कि इमरान खान की पत्नी बुर्के में रहती थीं, जिससे उनका असली चेहरा पहचानना मुश्किल था। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने दोहराया कि बुर्का पहनना इस्लाम की कोई मूल या अनिवार्य संस्कृति नहीं है, बल्कि इसे राजनीतिक औजार बनाया जा रहा है।
प्रकाश महाजन ने स्पष्ट किया कि जब जॉर्डन जैसे देशों के शासक परिवार, जिनका गहरा धार्मिक महत्व है, वे बुर्के को अनिवार्य नहीं मानते, तो भारत में ओवैसी जैसे नेताओं द्वारा इसे मेयर की कुर्सी से जोड़ना केवल तुष्टीकरण की राजनीति है। उन्होंने इसे प्रगतिशील समाज के लिए एक कदम पीछे जाने जैसा बताया।
मुंबई महानगरपालिका चुनाव से पहले असदुद्दीन ओवैसी के इस बयान ने धार्मिक और राजनीतिक ध्रुवीकरण को तेज कर दिया है। शिवसेना के इस पलटवार के बाद अब देखना यह होगा कि AIMIM या अन्य मुस्लिम संगठन इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।