शिंदे सेना में बगावत की आहट: निधि वितरण को लेकर असंतोष, क्या भाजपा की ओर बढ़ रहे शिंदे के सिपाही?

Rift In Mahayuti: महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल! शिंदे गुट के भीतर निधि वितरण को लेकर छिड़ा विवाद। उद्धव गुट का दावा कई विधायक भाजपा में जाने को तैयार। जानें क्या है पूरी हकीकत।
Signs of Rebellion in the Shinde Camp: Dissatisfaction Over Fund Allocation—Are Shinde's Soldiers Drifting Towards the BJP?
सांकेतिक फोटो (सोर्स: एआई फोटो)
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Shinde Shivsena Internal Conflict: महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव की दहलीज पर खड़ा है, लेकिन राज्य की सत्ताधारी महायुति सरकार के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में आंतरिक कलह अब सड़कों और मंचों पर खुलकर सामने आने लगी है। निधि वितरण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पार्टी में बड़ी फूट और नेताओं के पलायन की खबरों तक जा पहुंचा है।

अब्दुल सत्तार की नाराजगी और गैंगवॉर के आरोप

विवाद की शुरुआत छत्रपति संभाजीनगर से हुई, जहाँ शिंदे गुट के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री अब्दुल सत्तार ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सत्तार ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया कि उनके निर्वाचन क्षेत्र के साथ निधि आवंटन में भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने परोक्ष रूप से अपनी ही पार्टी के सहयोगी संजय शिरसाट पर निशाना साधा। हालांकि, शिरसाट ने सरकारी रिकॉर्ड का हवाला देते हुए इन आरोपों को खारिज कर दिया, लेकिन इस जुबानी जंग ने पार्टी के भीतर अनुशासन की पोल खोल दी है। विपक्ष ने इस स्थिति का भरपूर फायदा उठाया है। उद्धव ठाकरे गुट के नेता और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे ने शिंदे गुट पर तीखा प्रहार करते हुए इसे एक राजनीतिक दल के बजाय गैंग करार दिया, जहाँ उनके अनुसार गैंगवॉर चलती रहती है।

भाजपा की ओर बढ़ रहे शिंदे के सिपाही

इस पूरे घटनाक्रम के बीच पूर्व सांसद चंद्रकांत खैरे ने एक सनसनीखेज दावा किया है। खैरे के अनुसार, शिंदे गुट में मचे घमासान का फायदा भारतीय जनता पार्टी उठा सकती है। उन्होंने कहा, शिंदे की सेना में जबरदस्त असंतोष है। कई विधायक और बड़े नेता भाजपा के संपर्क में हैं और वे किसी भी समय पाला बदल सकते हैं। आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ी उथल-पुथल देखने को मिलेगी।

गठबंधन धर्म पर मंडराते खतरे के बादल

पार्टी के भीतर केवल निधि को लेकर ही नहीं, बल्कि आगामी चुनावों में सीटों के बंटवारे को लेकर भी तनाव बढ़ रहा है। जलगांव सीट को लेकर शिंदे गुट के किशोर पाटिल ने आक्रामक रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि महायुति में सम्मानजनक जगह नहीं मिली, तो वे मैत्रीपूर्ण लड़ाई (एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ना) के लिए तैयार हैं।

उपमुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले सांसद नरेश म्हस्के ने भी शिवसंवाद दौरे के जरिए कार्यकर्ताओं को रिचार्ज करना शुरू कर दिया है। उन्होंने संकेत दिया कि आगामी जिला परिषद चुनावों में शिवसैनिक अपने दम पर भगवा फहराने को तैयार हैं, चाहे गठबंधन हो या न हो।

निधि की कमी, सांगठिनक वर्चस्व की लड़ाई और भाजपा का बढ़ता प्रभाव ये तीन ऐसे कारक हैं जो शिंदे गुट के लिए भविष्य में बड़ी चुनौती बन सकते हैं। यदि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे समय रहते अपने विधायकों और सांसदों की नाराजगी दूर नहीं कर पाते, तो उद्धव ठाकरे गुट का पलायन वाला दावा महायुति के लिए एक बड़ा सिरदर्द साबित हो सकता है।

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