सत्यजीत तांबे का पलटवार गायकवाड़ ने दिखाया कि एक जन प्रतिनिधि को कैसा नहीं होना चाहिए

Sanjay Gaikwad Controversy: सत्यजीत तांबे ने संजय गायकवाड़ के व्यवहार की आलोचना करते हुए छत्रपति शिवाजी महाराज के समावेशी स्वराज्य और महिलाओं के प्रति उनके सम्मान को याद दिलाया।
Satyajit Tambe Hits Back: Gaikwad Demonstrated How a People's Representative Should *Not* Be.
सत्यजीत तांबे (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Satyajeet Tambe On Sanjay Gaikwad: महाराष्ट्र की राजनीति में अपने बयानों के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाले विधायक संजय गायकवाड़ एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। इस बार निर्दलीय विधायक सत्यजीत तांबे ने गायकवाड़ के आचरण और उनके द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा पर तीखा प्रहार किया है। तांबे ने कहा कि गायकवाड़ ने भले ही गलत तरीके से सही, लेकिन राज्य में एक महत्वपूर्ण बहस छेड़ दी है कि असली शिवाजी कौन थे? और साथ ही यह भी दिखा दिया है कि "एक जन प्रतिनिधि को कैसा नहीं होना चाहिए।

नई पीढ़ी के लिए अध्ययन जरूरी

सत्यजीत तांबे ने कॉमरेड गोविंद पानसरे की प्रसिद्ध पुस्तक "शिवाजी कोण होता?" (शिवाजी कौन थे?) का जिक्र करते हुए कहा कि आज की पीढ़ी के बीच महाराज की सही पहचान पहुंचना अनिवार्य है। उन्होंने एक भावुक किस्सा साझा करते हुए बताया कि पिछले हफ्ते मेरी बेटी अहिल्या ने मुझसे पूछा बाबा, आप जिस शिवाजी महाराज के बारे में बताते हैं और जो स्कूल में पढ़ाए जाते हैं, वे इतने अलग क्यों लगते हैं? तभी मुझे अहसास हुआ कि नई पीढ़ी तक महाराज का समावेशी और संतुलित इतिहास पहुंचाना कितना जरूरी है। तांबे ने याद दिलाया कि 2015 में जब गोविंद पानसरे पर हमला हुआ था, तब उन्होंने नगर शहर में इस पुस्तक की 10,000 प्रतियां बांटकर जन-जागरूकता फैलाने का प्रयास किया था।

समावेशी स्वराज्य और लोकतंत्र की नींव

सत्यजीत तांबे ने स्पष्ट किया कि छत्रपति शिवाजी महाराज का 'स्वराज्य' किसी एक धर्म या जाति का नहीं, बल्कि 'रैयत' (आम जनता) का था। महाराज ने 12 बलुतेदार, 18 पगड जातियों और सभी धर्मों के लोगों को साथ लेकर स्वराज्य बनाया। स्वराज्य वास्तव में एक लोकतांत्रिक विचार था, जहां राजा विलासिता के लिए नहीं, बल्कि प्रजा के कल्याण के लिए शासन करता था। महाराष्ट्र की आज की प्रगति इसी विचारधारा की नींव पर टिकी है।

गायकवाड़ को नसीहत

सत्यजीत तांबे ने संजय गायकवाड़ के एक वायरल फोन कॉल का जिक्र करते हुए कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि गायकवाड़ द्वारा महिलाओं के प्रति इस्तेमाल किए गए शब्द निंदनीय हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज का संस्कार था कि पराई स्त्री को माता के समान माना जाए। महाराज ने न केवल अपने राज्य की बल्कि शत्रुओं की महिलाओं का भी सदैव सम्मान किया।

यह तय है कि महाराज, गायकवाड़ द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दों के लिए उन्हें कभी माफ नहीं करते। उन्होंने अपील की कि यह पूरी चर्चा केवल विवाद के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सही अध्ययन और मार्गदर्शन के लिए होनी चाहिए।

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