

Sanjay Shirsat U-turn Atrocity Act: महाराष्ट्र की राजनीति में SC/ST (एट्रोसिटी) एक्ट को लेकर छिड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। विधानसभा के भीतर दिए गए एक बयान पर भारी विरोध और दलित संगठनों के आक्रोश के बाद, महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने अपने रुख पर 'यू-टर्न' ले लिया है। पहले सदन में यह संकेत दिए गए थे कि सरकार इस कानून के तहत होने वाली 'सीधी गिरफ्तारी' की प्रक्रिया में बदलाव कर सकती है, लेकिन अब मंत्री ने स्पष्ट किया है कि कानून में किसी भी तरह का संशोधन नहीं किया जाएगा और पुरानी व्यवस्था ही प्रभावी रहेगी।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब सदन में यह चर्चा उठी कि एट्रोसिटी एक्ट के दुरुपयोग को रोकने के लिए मामलों की पहले एक समिति द्वारा जांच की जानी चाहिए। विपक्षी दलों और दलित समुदायों ने इसे केंद्र और राज्य द्वारा एट्रोसिटी कानून को कमजोर करने की साजिश करार दिया, जिसके बाद सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा।
विधानसभा सत्र के दौरान मंत्री संजय शिरसाट ने वक्तव्य दिया था कि एट्रोसिटी एक्ट के तहत अब सीधी गिरफ्तारी नहीं होगी, बल्कि आरोप सही पाए जाने पर ही कार्रवाई की जाएगी। जैसे ही यह खबर बाहर आई, महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में दलित संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि देवेंद्र फडणवीस सरकार दलितों के अधिकारों का संरक्षण करने वाले सबसे मजबूत कानून को निष्प्रभावी बनाना चाहती है। चूंकि महाराष्ट्र की राजनीति में दलित मतदाता एक निर्णायक भूमिका निभाते हैं, इसलिए सरकार ने तुरंत डैमेज कंट्रोल की प्रक्रिया शुरू कर दी।
मामला बिगड़ता देख संजय शिरसाट ने मीडिया के सामने आकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनके पिछले बयान का गलत अर्थ निकाला गया और समाज में भ्रम फैलाया जा रहा है। शिरसाट ने साफ किया, "एट्रोसिटी कानून में कोई बदलाव नहीं किया गया है। जो कानून पहले था, वही रहेगा। मैंने केवल कानून के क्रियान्वयन और उसकी प्रक्रिया के बारे में बात की थी।" उन्होंने यह भी घोषणा की कि वे इस विषय पर विधानसभा में एक आधिकारिक निवेदन (Statement) पेश करेंगे ताकि किसी भी प्रकार की शंका की गुंजाइश न रहे।
महाराष्ट्र में एट्रोसिटी एक्ट हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। राज्य में आगामी नगर निगम और स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए महायुति सरकार किसी भी समुदाय, विशेषकर अनुसूचित जाति और जनजाति को नाराज करने का जोखिम नहीं उठा सकती। एट्रोसिटी एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों पर भी देशव्यापी विरोध देखा जा चुका है, ऐसे में राज्य सरकार द्वारा किसी भी प्रकार की नई 'जांच समिति' का प्रस्ताव राजनीतिक रूप से आत्मघाती साबित हो सकता था। मंत्री के यू-टर्न ने फिलहाल इस विवाद को शांत करने की कोशिश की है।