सोनम वांगचुक के ऑर्गन फेलियर की चेतावनी को लेकर सरकार पर बरसे संजय राउत

Sanjay Raut Sonam Wangchuk Hunger Strike: सोनम वांगचुक के अनशन के 20वें दिन संजय राउत ने उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।
Sonam Wangchuk Hunger Strike Sanjay Raut Attack
सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर बरसे संजय राउत (फोटो क्रेडिट-X)
Updated on

Sonam Wangchuk Hunger Strike Sanjay Raut Attack: शिक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक घोटाले को लेकर शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और लद्दाख की मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और सुधारक सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन अनशन का आज (शुक्रवार, 17 जुलाई) 20वां दिन है। कड़कड़ाती ठंड और कठिन परिस्थितियों के बीच वांगचुक की सेहत लगातार गंभीर होती जा रही है। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, अब तक उनका करीब 9 किलोग्राम वजन घट चुका है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि उनके शरीर में तेजी से मसल लॉस हो रहा है और यदि यही स्थिति रही तो जल्द ही ऑर्गन फेलियर (अंगों का काम बंद करना) का गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

सोनम वांगचुक की इस बेहद नाजुक स्थिति को लेकर शिवसेना (यूबीटी) के फायरब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत का गुस्सा फूट पड़ा है। राउत ने केंद्र सरकार की संवेदनशीलता पर तीखे सवाल खड़े करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पूरी कैबिनेट को आड़े हाथों लिया है।

क्या कैबिनेट में एक भी ऐसा मंत्री नहीं जो ध्यान दे

संजय राउत ने दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार किया। जब राउत के सामने यह तथ्य रखा गया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकारी डॉक्टरों की एक टीम को सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की उचित देखभाल करने के निर्देश जारी किए हैं, तो राउत ने न्यायपालिका की भूमिका पर भी अपनी बेबाक राय रखी।

राउत ने तंज कसते हुए कहा, "हाई कोर्ट को केवल डॉक्टरों को ही नहीं, बल्कि सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी यह निर्देश देना चाहिए कि वे सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य और उनकी मांगों पर ध्यान दें। अदालत को यह भी निर्देश जारी करना चाहिए कि नीट (NEET) पेपर लीक 2026 मामले में जिम्मेदार संबंधित मंत्री का तुरंत इस्तीफा लिया जाए और सोनम वांगचुक का अनशन सम्मानपूर्वक तुड़वाया जाए।" राउत ने आगे जोड़ा कि यदि मौजूदा सरकार हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की बातों को गंभीरता से मान लेती, तो आज देश का पूरा राजनीतिक चरित्र ही बदल गया होता।

"देश संभालने वालों की संवेदना पूरी तरह मर चुकी है"

यूबीटी नेता ने केंद्र के शीर्ष नेतृत्व के प्रति अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि लद्दाख के अधिकारों की रक्षा के लिए चल रहे इस आंदोलन को 20 दिन पूरे होने वाले हैं। वहां न केवल सोनम वांगचुक, बल्कि उनके समर्थन में कई अन्य छात्र भी भूख हड़ताल पर बैठे हैं, जिनमें 20 साल की एक युवती भी शामिल है जिसकी हालत भी गंभीर बनी हुई है।

राउत ने भावुक और आक्रामक होते हुए सवाल किया, "जब डॉक्टर ऑर्गन फेलियर जैसी जानलेवा स्थिति की चेतावनी दे रहे हैं, तो क्या यह बात प्रधानमंत्री और गृहमंत्री तक नहीं पहुंच रही होगी? क्या इसकी खुफिया रिपोर्ट महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पास नहीं भेजी गई होगी? इन सबके बावजूद सरकार की तरफ से कोई संवाद न होना यह दर्शाता है कि देश संभालने वाले हुक्मरानों की मानवीय संवेदना पूरी तरह से मर चुकी है।"

जान बचाना देश का कर्तव्य; बीजेपी को राष्ट्रभक्त नहीं कहूंगा

संजय राउत यहीं नहीं रुके, उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों की चुप्पी पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की इतनी बड़ी कैबिनेट में क्या एक भी ऐसा जिम्मेदार नेता नहीं है जो प्रधानमंत्री के सामने खड़े होकर यह कह सके कि वांगचुक के साथ जो किया जा रहा है वह गलत है।

राउत ने अंत में चेतावनी भरे लहजे में कहा कि सोनम वांगचुक जैसे देशभक्त की जान बचाना इस पूरे देश का सर्वोच्च कर्तव्य है। यदि पूरी कैबिनेट में प्रधानमंत्री से यह सच कहने का साहस किसी में नहीं है, तो वे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं को न तो राष्ट्रभक्त मानेंगे और न ही उन्हें शूरवीर कहेंगे। इस तीखे बयान के बाद एक बार फिर लद्दाख आंदोलन को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।

Navbharat Live
navbharatlive.com