

संजय राउत और आशीष शेलार के एक मंच पर आने से हलचल मची।
राउत ने बयान दिया कि उनका देवेंद्र फडणवीस से कोई बैर नहीं है।
दोनों विरोधी नेताओं की नजदीकी देखकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं बहुत तेज हुईं।
Sanjay Raut Statement On Devendra Fadnavis: महाराष्ट्र की राजनीति में बीते दो दिनों में घटे अप्रत्याशित घटनाक्रमों ने सियासी गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है। एक तरफ जहां गुरुवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और ठाकरे बंधु एक ही मंच पर मुस्कुराते नजर आए, वहीं उसके ठीक अगले ही दिन शिवसेना (UBT) के फायरब्रांड नेता व सांसद संजय राउत और भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता व मंत्री आशीष शेलार एक साथ मंच साझा करते दिखे।
इस दौरान दोनों नेताओं के बीच एक बेहद अनोखी और अलग ही केमिस्ट्री देखने को मिली।
शुक्रवार को मुंबई के बांद्रा पूर्व स्थित आईईएस न्यू इंग्लिश स्कूल के सभागृह में वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र मुलिक की पुस्तक सुडाचं राजकारण (प्रतिशोध की राजनीति) का विमोचन समारोह आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में एक-दूसरे के कड़े प्रतिद्वंद्वी माने जाने वाले संजय राउत और भाजपा नेता आशीष शेलार न केवल एक साथ पहुंचे, बल्कि पूरे समारोह के दौरान एक-दूसरे के ठीक बगल में पास-पास बैठे नजर आए और आपस में संवाद करते दिखे।
अक्सर भाजपा और केंद्र सरकार पर तीखे जुबानी हमले करने वाले संजय राउत का रुख इस मंच पर पूरी तरह बदला-बदला नजर आया। राउत ने अपने भाषण में कहा, मेरा किसी से कोई झगड़ा या बैर नहीं है। मेरा न तो नरेंद्र मोदी से झगड़ा है, न अमित शाह से और न ही देवेंद्र फडणवीस से कोई बैर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सिद्धांतों, मुद्दों और विचारों की लड़ाई लोकतंत्र के दायरे में रहकर लड़ रहे हैं।
अतीत के रिश्तों को याद करते हुए राउत ने कहा, हम 25 साल तक एक साथ रहे हैं। कल उद्धव ठाकरे और मुख्यमंत्री भी एक साथ थे, जहां उनके बीच अच्छी बातचीत हुई। 25 साल हम साथ थे, अब भविष्य में क्या होगा, यह कुछ कहा नहीं जा सकता क्योंकि राजनीति और लोगों का मन बेहद चंचल होता है।
कार्यक्रम में जब भाजपा नेता आशीष शेलार के संबोधन की बारी आई, तो उन्होंने माहौल को हल्का करते हुए अपने चिर-परिचित अंदाज में जवाब दिया। शेलार ने बताया कि कार्यक्रम से पहले लोगों ने उनसे पूछा था कि क्या वे राउत के साथ मंच पर बैठेंगे। इस पर शेलार ने कहा, मैं दाऊद के साथ नहीं बैठ सकता, लेकिन राउत के साथ बिल्कुल बैठ सकता हूं।
वैचारिक मतभेदों पर बात करते हुए शेलार ने कहा कि भले ही पुस्तक के विचारों और कई मुद्दों पर उनके और राउत के बीच मतभेद हों, लेकिन हम दोनों असहमति में सहमत हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक कड़वाहट के बावजूद कला, साहित्य और संस्कृति के मंचों पर विरोधी नेताओं का एक साथ आना महाराष्ट्र की महान और प्रगल्भ लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा रहा है।
इस घटनाक्रम से ठीक एक दिन पहले गुरुवार को मुंबई के दादर में कार्टूनिस्ट प्रशांत कुलकर्णी द्वारा संपादित पुस्तक महाराष्ट्राच्या हास्यरेषा का विमोचन हुआ था। उस दुर्लभ अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार के साथ-साथ लंबे समय बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक ही मंच पर एक साथ उपस्थित हुए थे।
उस समय मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने कहा था कि राजनीतिक मतभेदों को किनारे रखकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों में एक साथ आना महाराष्ट्र की समृद्ध संस्कृति रही है।
लगातार दो दिनों में घटे इन दो बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद अब यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या यह केवल साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का औपचारिक शिष्टाचार है, या फिर महाराष्ट्र की राजनीति में किसी नए समीकरण और बड़े बदलाव की बिसात बिछ रही है।