डेड, शिफ्टेड और डुप्लीकेट वोटर्स... संजय निरुपम ने समझाया महाराष्ट्र में SIR का पूरा गणित

Sanjay Nirupam On Maharashtra SIR Process: महाराष्ट्र में SIR प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर संजय निरुपम का बड़ा बयान। जानिए मृत, शिफ्टेड और डुप्लीकेट वोटर्स को लेकर क्या है पूरा चुनावी गणित।
sanjay nirupam explains sir process and voter math in maharashtra
संजय निरुपम (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Highlights

  • संजय निरुपम ने महाराष्ट्र में एसआईआर प्रक्रिया की पूरी सफलता का समर्थन किया है।

  • निरुपम ने स्पष्ट किया कि मृत और डुप्लीकेट वोटर्स के कारण आंकड़े बड़े दिखे।

  • मद्रास हाईकोर्ट के फैसले का समर्थन करते हुए उन्होंने धर्म परिवर्तन और आरक्षण पर बात की।

Sanjay Nirupam Explains SIR Process And Voter Math: महाराष्ट्र में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई पर शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रवक्ता संजय निरुपम ने प्रतिक्रिया दी है। साथ ही उन्होंने धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण के मामले में मद्रास हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी समर्थन किया।

महाराष्ट्र में एसआईआर के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के नोटिस पर संजय निरुपम ने कहा कि वह कोर्ट की सुनवाई का स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा, महाराष्ट्र में एसआईआर प्रक्रिया को सफलतापूर्वक लागू किया गया था और यह अभी चल रही है, हालांकि इस प्रक्रिया के पहले और दूसरे चरण के दौरान यह देखा गया कि लगभग 2 करोड़ 7 लाख मतदाताओं को मैप या सूचीबद्ध नहीं किया जा सका। हमें भी यह आंकड़ा बहुत बड़ा दिखा।

मृत, शिफ्टेड और डुप्लीकेट वोटर्स का गणित

उन्होंने आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए कहा, जब हमने विस्तार से अध्ययन किया तो पाया कि करीब 37 लाख वोटर इसमें मर चुके हैं। करीब 17-18 लाख वोटर के नाम तीन-चार जगह पर हैं। करीब 70-75 लाख वोटर एक से दूसरे जगह शिफ्ट हो चुके हैं, मतलब उनके नाम दो बार रिपीट हैं। लाखों में उन वोटर्स के नाम हैं, जो उस समय घर पर मौजूद नहीं थे, जब बीएलओ उनके घर गए।

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प्रक्रिया पर बोले संजय निरुपम का दावा

संजय निरुपम ने कहा कि आने वाले समय में सुप्रीम कोर्ट इस पूरे प्रकरण की सुनवाई करेगा। उन्होंने कहा, हम भी नहीं चाहते कि एसआईआर के बहाने किसी भी वास्तविक वोटर का नाम कटे और कोई भी अधिकारी मनमानी हरकत करे, जिससे कोई वोट देने से वंचित रह जाए। हम सुप्रीम कोर्ट की याचिका का सम्मान करते हैं। कोर्ट जो भी फैसला करेगा, वह स्वीकार्य है।

धर्म परिवर्तन और आरक्षण के संबंध में मद्रास हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर लगने पर भी निरुपम ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कई लोग धर्म बदलने के बाद भी आरक्षण का लाभ लेते रहते हैं, जो गलत है।

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धर्म बदलने वालों पर निरुपम का तीखा तंज

निरुपम ने कहा, कई हिंदू विशेष रूप से पिछड़ी जातियों या अनुसूचित जातियों के लोग, चर्चों या मिशनरियों के बहकावे में आकर दूसरे धर्मों में परिवर्तित हो जाते हैं। इसके बावजूद वे भारत में मौजूद आरक्षण व्यवस्था का लाभ लेना जारी रखते हैं। उनका तर्क है कि चूंकि वे मूल रूप से एससी श्रेणी से थे, इसलिए इस्लाम या ईसाई धर्म में परिवर्तित होने के बाद भी वे एससी ही बने रहते हैं।

उन्होंने कहा, मद्रास हाईकोर्ट ने इस धारणा को खारिज कर दिया है और स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति, जो पहले पिछड़ी जाति का हिंदू था, किसी अन्य धर्म में परिवर्तित हो जाता है, तो वह अब किसी भी श्रेणी के अंतर्गत नहीं आता है।

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