

Sanjay Nirupam On Asaduddin Owaisi: AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी की वंदे मातरम पर की गई टिप्पणी पर शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गीत का विरोध करने वाला असल में भारतीय नहीं है और उसे इस देश में रहने का कोई अधिकार नहीं है।
मुंबई में मीडिया बातचीत में शिवसेना नेता संजय निरुपम ने कहा कि वंदे मातरम गीत अपनी 150वीं वर्षगांठ मना रहा है। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लाखों स्वतंत्रता सेनानियों और आम लोगों ने इसे गाया था और इससे प्रेरणा ली थी। अगर कोई वंदे मातरम पर आपत्ति जताता है, तो वह असल में भारतीय नहीं है। जो कोई भी इस गीत का विरोध करता है, उसे इस देश में रहने का कोई अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि असदुद्दीन ओवैसी के पूर्वजों ने शायद यह गीत न गाया हो लेकिन अंग्रेजों के खिलाफ हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने इसे गाया था। निरुपम ने साफ चेतावनी दी कि वंदे मातरम का अपमान भारत का अपमान है और ऐसे लोगों की नागरिकता तक रद्द की जानी चाहिए।
हिंदी भाषा का जिक्र करते हुए संजय निरुपम ने कहा कि कोई किसी को हिंदी बोलने के लिए मजबूर नहीं करता। भले ही हिंदी को राष्ट्रभाषा न माना जाए, लेकिन यह राजभाषा और संवाद की भाषा के रूप में स्थापित है। इसे किसी ने थोपा नहीं है। अगर सरकारी अधिकारियों के लिए हिंदी सीखने का कोई प्रस्ताव आया है, तो मुझे नहीं लगता कि इस पर ज्यादा विवाद होना चाहिए। हिंदी सीखना नुकसान का सौदा नहीं है।
तमिलनाडु में एक्टर विजय की पार्टी TVK को समर्थन देने वाले कांग्रेस के फैसले पर संजय निरुपम ने कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने गठबंधन का धर्म कभी नहीं निभाया। कांग्रेस का इतिहास यही रहा है। तमिलनाडु चुनाव में कांग्रेस ने डीएमके के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
निरुपम ने कहा कि एक नई पार्टी और अभिनेता विजय एक राजनीतिक नेता के रूप में उभरे हैं, तो कांग्रेस ने सत्ता की मलाई खाने के लिए अपने 5 विधायकों के साथ उसका समर्थन कर दिया, जबकि वह पार्टी डीएमके के खिलाफ चुनाव लड़कर आई थी। यह गठबंधन धर्म का अपमान है। कांग्रेस सत्ता लोभी पार्टी है और किसी भी प्रकार से किसी से भी समझौता कर सकती है।
उन्होंने सोमनाथ मंदिर का जिक्र करते हुए कहा कि एक हजार साल पहले महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर कई बार हमला किया था। उसने इस प्राचीन शिव मंदिर को तबाह और लूट लिया था। आज हम सोमनाथ पर हुए हमले की हजारवीं वर्षगांठ मना रहे हैं। सोमनाथ मंदिर का पुनरुद्धार और पुनर्निर्माण भारत के पुनरुत्थान और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रमुख प्रतीक है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)