मुंबई: आपके नाम पर कितने सिम हैं? 'संचार साथी ऐप' से जानें, 1.77 करोड़ संदिग्ध कनेक्शन पर गिरी गाज

Sanchar Saathi App Mumbai DoT: दूरसंचार विभाग के आशीष पाठक ने बताया कैसे 'चक्षु' ऐप से रुक रही है डिजिटल धोखाधड़ी और 1400 करोड़ का वित्तीय फ्रॉड।
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Sanchar Saathi App Mumbai DoT (फोटो क्रेडिट-X)
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Ashish Pathak ADG Mumbai: भारत का दूरसंचार क्षेत्र वर्तमान में एक क्रांतिकारी बदलाव के दौर से गुजर रहा है, लेकिन इसके साथ ही नागरिकों की गोपनीयता और साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करना दूरसंचार विभाग (DoT) के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। इसी गंभीर विषय पर दूरसंचार विभाग (मुंबई) के अपर महानिदेशक एवं प्रमुख आशीष पाठक ने 'नवभारत' से विशेष बातचीत की। उन्होंने बताया कि विभाग ने उपभोक्ताओं को स्पैम और धोखाधड़ी से बचाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कई सॉफ्टवेयर टूल्स विकसित किए हैं, जिन्हें अब 'संचार साथी ऐप' में एकीकृत कर दिया गया है।

आशीष पाठक के अनुसार, संचार साथी ऐप एक नागरिक-केंद्रित पहल है जो मोबाइल उपयोगकर्ताओं को सशक्त बनाती है। इस पोर्टल और ऐप के माध्यम से अब तक करोड़ों उपयोगकर्ताओं ने अपनी सुरक्षा सुनिश्चित की है। विभाग ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों और बैंकों के साथ रियल-टाइम समन्वय स्थापित किया है, जिससे न केवल संदिग्ध नंबरों को ब्लॉक किया जा रहा है, बल्कि करोड़ों रुपये की संभावित धोखाधड़ी को भी रोका जा सका है।

'चक्षु' और अन्य प्रभावी फीचर्स

पाठक ने बताया कि ऐप में 'अपने नाम पर मोबाइल कनेक्शन जानें' नामक टूल बेहद लोकप्रिय हुआ है। इसके जरिए नागरिकों के फीडबैक पर लगभग 1.77 करोड़ ऐसे कनेक्शन डिस्कनेक्ट किए गए, जिन्हें उपयोगकर्ताओं ने 'मेरा नंबर नहीं' के रूप में रिपोर्ट किया था। इसके अलावा, 'चक्षु' फीचर के माध्यम से कोई भी नागरिक फिशिंग एसएमएस, फर्जी पुलिस अधिकारी या बैंक कर्मचारी बनकर आने वाली कॉल्स की रिपोर्ट कर सकता है। इस टूल की मदद से अब तक 2.27 लाख मोबाइल हैंडसेट ब्लॉक किए जा चुके हैं।

वित्तीय धोखाधड़ी पर 1400 करोड़ का प्रहार

वित्तीय अपराधों को रोकने के लिए DoT ने 'फाइनेंशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर (FRI)' टूल विकसित किया है। यह टूल संदिग्ध नंबरों की पहचान कर 1100 से अधिक बैंकों और UPI प्रदाताओं के साथ जानकारी साझा करता है। पाठक ने खुलासा किया कि इस तकनीक की मदद से अब तक 1400 करोड़ रुपये से अधिक की डिजिटल लूट को रोकने में सफलता मिली है। विभाग जल्द ही 'मोबाइल नंबर वैलिडेशन सिस्टम (MNVS)' भी शुरू करने जा रहा है, जो बैंक डेटा के आधार पर ग्राहकों का सटीक सत्यापन करेगा।

सुरक्षा नियम और अंतरराष्ट्रीय कॉल का खतरा

नियमों के अनुसार, एक नागरिक अपने नाम पर अधिकतम 9 सिम कनेक्शन रख सकता है। सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए अब बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। पाठक ने नागरिकों को सचेत करते हुए कहा कि यदि किसी अंतरराष्ट्रीय कॉल पर भारतीय नंबर (+91) दिखाई दे, तो उसे तुरंत रिपोर्ट करें। ऐसी कॉलें अक्सर अवैध टेलीकॉम सेटअप के जरिए की जाती हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं। 'संचार साथी' के माध्यम से नागरिक ऐसे अवैध एक्सचेंजों को बंद करवाने में सरकार की मदद कर सकते हैं।

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