जलना नगर निगम: शिवसेना-बीजेपी में भिड़ंत, अक्षय गोरंत्याल और कमलेश खरे के बीच तीखी झड़प

Jalna Municipal Corporation Clash: जालना नगर निगम में अक्षय गोरंत्याल और कमलेश खरे के बीच भिड़ंत। महात्मा फुले मार्केट पर बरसे पार्षद। शिवसेना और बीजेपी को आमने-सामने देख कमिश्नर ने किया किनारा।
Jalna Municipal Corporation Clash
Jalna Municipal Corporation Clash (फोटो क्रेडिट-X)
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Jalna Municipal Corporation: महाराष्ट्र के जालना में 'महायुति' के भीतर जारी खींचतान एक बार फिर सरेआम हो गई है। भाजपा नेता रावसाहेब दानवे और शिवसेना विधायक अर्जुन खोटकर द्वारा शहर के विकास के लिए मिलकर काम करने के दावे के महज 24 घंटे बाद ही, जालना नगर निगम की आम बैठक (General Body Meeting) अखाड़ा बन गई। सोमवार को हुई इस बैठक में भाजपा पार्षद अक्षय गोरंत्याल और शिवसेना के विपक्षी नेता कमलेश खरे के बीच तीखी बहस और हाथापाई की नौबत आ गई।

विवाद की शुरुआत शहर के ऐतिहासिक महात्मा फुले मार्केट के पुननिर्माण के मुद्दे पर हुई। सदन में चर्चा के दौरान दोनों दलों के पार्षद अपनी सीटों से उठकर एक-दूसरे की ओर बढ़ने लगे, जिससे हॉल का माहौल गरमा गया। महापौर वंदना मगरे के बार-बार शांत रहने के निर्देशों के बावजूद लगभग आधे घंटे तक सदन में हंगामा चलता रहा। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि उप महापौर राजेश राउत को हस्तक्षेप करने के लिए अपनी कुर्सी से नीचे उतरना पड़ा।

महात्मा फुले मार्केट: 15 साल पुराना विवाद

भाजपा पार्षद अक्षय गोरंत्याल ने सवाल उठाया कि 15 साल पहले ध्वस्त किए गए महात्मा फुले मार्केट के निर्माण के लिए प्रशासन ने अब तक क्या कार्रवाई की है? इसके जवाब में शिवसेना के कमलेश खरे ने तत्कालीन शिवसेना कार्यकाल के प्रस्तावों का हवाला दिया। इस पर भाजपा पार्षदों ने पलटवार करते हुए पूछा कि शिवसेना के शासनकाल में बाजार को किस आधार पर गिराया गया था। इसी बहस ने व्यक्तिगत आरोपों का रूप ले लिया और अक्षय गोरंत्याल व कमलेश खरे के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई।

नई कमिश्नर अंजलि शर्मा का पहला अनुभव

संयोग से, IAS अंजलि शर्मा ने सोमवार को ही जालना नगर निगम के आयुक्त के रूप में पदभार संभाला था। अपने कार्यकाल की पहली ही आम बैठक में पार्षदों के बीच मची इस अफरा-तफरी और 'राडा' को देखकर वे हैरान रह गईं। हंगामे को बढ़ता देख, उन्होंने महापौर से अनुमति ली और एक महत्वपूर्ण बैठक का हवाला देते हुए सदन से बाहर निकल गईं। उनके जाते ही सदन में शोर-शराबा और बढ़ गया, जिसे महापौर की कड़ी चेतावनी के बाद ही शांत किया जा सका।

गठबंधन की राजनीति पर सवाल

जालना नगर निगम में भाजपा के पास 100% बहुमत है, लेकिन राज्य में सहयोगी होने के बावजूद यहाँ शिवसेना मुख्य प्रतिद्वंद्वी की भूमिका में है। आज की घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि दानवे और खोटकर के बीच जमीनी स्तर पर तालमेल की भारी कमी है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि आगामी पांच वर्षों तक प्रशासन इसी तरह चलता रहा, तो शहर के विकास कार्य राजनीति की भेंट चढ़ सकते हैं। फिलहाल, महापौर ने सख्त रुख अपनाते हुए भविष्य में नियमों के उल्लंघन पर सदस्यों को निलंबित करने की चेतावनी दी है।

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