

Ravikant Tupkar Mantralaya Tree Protest: महाराष्ट्र में किसानों की पूर्ण कर्जमाफी और विभिन्न कृषि मांगों को लेकर स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के पूर्व नेता और कद्दावर किसान नेता रविकांत तुपकर का आंदोलन अब बेहद उग्र और हिंसक मोड़ ले चुका है। तुपकर के अन्नत्याग आंदोलन (खाद्य बहिष्कार) का आज चौथा दिन है। भूख हड़ताल के कारण बुलढाणा में तुपकर की तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही है, जिससे उनके समर्थकों और किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है।
इस आंदोलन की गूंज देश की आर्थिक राजधानी मुंबई तक पहुंच गई है, जहां मंत्रालय के ठीक सामने हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। प्रशासन द्वारा आंदोलन की अनदेखी किए जाने से नाराज कार्यकर्ताओं ने मुंबई से लेकर बुलढाणा तक तोड़फोड़ और आगजनी शुरू कर दी है, जिससे पूरे राज्य का माहौल गरमा गया है।
गुरुवार को मुंबई में देश के सबसे सुरक्षित प्रशासनिक भवनों में से एक 'मंत्रालय' के ठीक सामने उस समय हड़कंप मच गया, जब रविकांत तुपकर का एक समर्थक सुरक्षा घेरे को तोड़कर वहां स्थित एक ऊंचे पेड़ पर चढ़ गया। इस कार्यकर्ता के हाथ में धागों से भरे बम (सुतली बम) का एक थैला था। जब नीचे तैनात पुलिसकर्मियों और दमकल कर्मियों ने उसे रोकने और नीचे उतारने का प्रयास किया, तो उसने पेड़ के ऊपर से ही पुलिस पर सुतली बम फेंकने शुरू कर दिए। इस अप्रत्याशित हमले से मंत्रालय परिसर में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी मच गई। बाद में उस कार्यकर्ता ने पेड़ पर ही खड़े होकर राष्ट्रगान गाना शुरू कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने उसे बड़ी मशक्कत से हिरासत में लिया।
उधर, जमीनी स्तर पर विदर्भ के बुलढाणा जिले में यह आंदोलन पूरी तरह हिंसक हो चुका है। उग्र किसानों ने सरकार द्वारा घोषित कर्जमाफी को 'फर्जी' करार देते हुए बुधवार देर रात मेहकर स्थित तलाठी (पटवारी) कार्यालय और मेहकर तालुका के ही हिवरा आश्रम में आग लगाने का प्रयास किया। इसके अलावा, जालना-खामगांव मार्ग पर चिखली के पास स्थित एक टोल बूथ को प्रदर्शनकारियों ने पूरी तरह आग के हवाले कर दिया। इतना ही नहीं, खामगांव शहर में अज्ञात प्रदर्शनकारियों द्वारा उपमंडल अधिकारी (SDO) कार्यालय के मुख्य द्वार पर ज्वलनशील पदार्थ फेंककर सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। शहर पुलिस ने इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बुलढाणा से जारी एक वीडियो संदेश में किसान नेता रविकांत तुपकर ने कोलाबा पुलिस द्वारा उनके शांतिपूर्ण कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने पर तीखा आक्रोश व्यक्त किया। तुपकर ने चेतावनी देते हुए कहा, "मुंबई में किसानों की आवाज को जबरन दबाया जा रहा है। झड़प में घायल हुए हमारे कार्यकर्ताओं का मेडिकल तक नहीं कराया गया है। अगर उन्हें बिना शर्त तुरंत रिहा नहीं किया गया, तो राज्य भर से हजारों किसान मुंबई की ओर मार्च करेंगे।" दूसरी तरफ, तुपकर की मां ने भी सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए भावुक लहजे में कहा, "सरकार माता-पिता की तरह होती है, लेकिन यह सरकार ऊंट पर बैठी है जिसे जमीन का कुछ नहीं दिख रहा। अगर भूख हड़ताल से मेरे बेटे की सेहत को कुछ भी नुकसान हुआ, तो यह सरकार बच नहीं पाएगी, इसे गिरना ही होगा।"