12 साल बाद रानी बाग में गूंजेगी एशियाटिक शेरों की दहाड़? गुजरात से लाने की तैयारी तेज

Rani Baug Asiatic Lion Proposal: रानी बाग में 12 वर्षों से शेरों का अभाव है। अब गुजरात के सक्करबाग प्राणी उद्यान से चार एशियाटिक शेर लाने का प्रस्ताव तैयार है। केंद्रीय अनुमति के बाद प्रक्रिया शुरू।
Asiatic Lion
एशियाई शेर (सौ. सोशल मीडिया )
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Mumbai Zoo Lion Return Plan: 'थांबा मी लवकरच येत आहे (रुको।। मैं जल्द ही आ रहा हूं)', यह पोस्टर रानी बाग में नए रूप से तैयार किए गए शेर के बाड़े में लगाया गया है। इसके शेर की तस्वीर के साथ एक अन्य पोस्टर पर लिखा है कि "मेरे आगमन का इंतजार करो।

वीरमाता जिजाबाई भोसले वनस्पति उद्यान जिसे रानी बाग के नाम से भी जाना जाता है वहां 12 वर्ष बाद भी शेरों के आगमन का इंतजार जारी है। आगंतुक बड़े ही उत्साह के साथ शेर के खाली बेड़े की ओर देखते है, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ रखती है। हालांकि, मनपा प्रशासन का कहना है कि, शेरों को लाने का प्रयास जारी है।

रानी बाग में वर्ष 2014 से शेर नहीं हैं, जब 16 वर्षीय अफ्रीकी-एशियाई संकर 'जिमी' की लंबी बीमारी के बाद मृत्यु हो गई थी। रानी बाग में जल्द ही एशियाटिक शेरों की दहाड़ सुनाई दे सकती है। रानी बाग में गुजरात से एशियाटिक लायन लाने की तैयारियां तेज हो गई हैं।

इस संबंध में हाल ही में महापौर ने रानी बाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर विस्तृत चर्चा की है। सूत्रों के मुताबिक महापौर इस परियोजना को लेकर उत्साहित हैं और उन्होंने सकारात्मक संकेत दिए हैं। बीएमसी के एक अधिकारी ने बताया कि गुजरात के जूनागढ़ स्थित सक्करबाग प्राणी उद्यान से चार एशियाटिक शेर मुंबई लाने का प्रस्ताव है। इसके बदले रानी बाग की ओर से चार जेब्रा देने की योजना बनाई गई है।

शेरों के बदले पेंगुइन देने का रखा गया था प्रस्ताव

खास बात यह है कि ये जेब्रा इजरायल से लाए जाने वाले है। इस अदला-बदली की तैयारी वर्ष 2019 से चल रही है, लेकिन पहले कोविड-19 महामारी और बाद में इजरायल फिलिस्तीन युद्ध के कारण यह योजना अमल में नहीं आ सकी। अधिकारियों ने यह भी बताया कि सक्करबाग प्रशासन को शेरों के बदले पेंगुइन देने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन यह विकल्प आगे नहीं बढ़ सका। सक्करबाग के अधिकारियों का कहना था कि पेंगुइन के लिए विशेष ठंडे इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होती है, जो उनके पास उपलब्ध नहीं है। इसी वजह से पेंगुइन के आदान-प्रदान पर सहमति नहीं बन पाई।

साबित होगी एक बड़ी सौगात

गौरतलब है कि देश में एक चिड़ियाघर से दूसरे चिड़ियाघर में किसी भी वन्य जीव के स्थानांतरण के लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की अनुमति अनिवार्य होती है, जो पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।

संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद ही शेरों को लाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। फिलहाल महापौर की ओर से मिले सकारात्मक संकेतों के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही एशियाटिक शेर मुंबई के रानी बाग में पहुंचेंगे, जिससे शहरवासियों और पर्यटकों के लिए यह एक बड़ी सौगात साबित होगी।

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