

Ramdas Athawale Statement On Sharad Pawar: महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों वह तापमान देखने को मिल रहा है जो शायद दशकों में नहीं दिखा। कयासों और दावों के इस दौर में अब एक नया अध्याय जुड़ गया है। केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने यह कहकर खलबली मचा दी है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के संस्थापक शरद पवार एनडीए में शामिल हो सकते हैं।
मंत्री का बड़ा दावा है कि यदि पवार ने 2014 में ही यह कदम उठा लिया होता, तो वह आज भारत के राष्ट्रपति बन चुके होते। इस दावे ने न केवल विपक्ष को क्या करें और क्या न करें की स्थिति में डाल दिया है, बल्कि महाराष्ट्र की महा विकास अघाड़ी गठबंधन के भीतर भी गहरी दरारें और अविश्वास स्पष्ट कर दिया है।
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि शरद पवार महाराष्ट्र के सबसे सम्मानित नेताओं में से एक हैं और उन्हें कई बार एनडीए में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। आठवले का मानना है कि 2014 में एनडीए के साथ न आने की वजह से शरद पवार ने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठने का मौका गंवा दिया। वर्तमान में भी ऐसी चर्चाएं जोरों पर हैं कि पवार की अगुवाई वाली एनसीपी केंद्र के सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा बन सकती है।
इस चर्चा को और हवा तब मिली जब शरद पवार ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से उनके कार्यालय में मुलाकात की। हालांकि, पवार गुट वाली एनसीपी ने इसे एक शिष्टाचार भेंट करार दिया है और कहा कि एक वरिष्ठ नेता के तौर पर पवार महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद, सूखा और आरक्षण जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा करने गए थे। लेकिन इस मुलाकात ने महा विकास अघाड़ी के सहयोगियों, विशेष रूप से शिवसेना ठाकरे गुट को असहज कर दिया है।
शिवसेना ठाकरे गुट के नेता संजय राउत इस मुलाकात से काफी आहत नजर आ रहे हैं। उन्होंने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर निशाना साधते हुए उन्हें देश का सबसे बड़ा गद्दार तक कह दिया। राउत का तर्क है कि जब कोई वरिष्ठ नेता उस व्यक्ति के घर या दफ्तर जाकर चाय पीता है जिसने पार्टी तोड़ी और सरकार गिराई, तो इससे आम कार्यकर्ताओं की भावनाओं को ठेस पहुंचती है और नेता की विश्वसनीयता कम होती है। राउत ने यहां तक कहा कि पवार का शिंदे के कार्यालय जाना गद्दारों को महिमामंडित करने जैसा है।
संजय राउत की टिप्पणियों पर एनसीपी और एनडीए के नेताओं ने भी कड़ा रुख अपनाया है। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने राउत को जवाब देते हुए कहा कि एकनाथ शिंदे को गद्दार कहना गलत है, बल्कि उद्धव ठाकरे और संजय राउत ने ही 2019 में कांग्रेस-एनसीपी के साथ जाकर जनादेश का अपमान किया था। वहीं, शरद पवार गुट के प्रवक्ता अमोल मातेले ने राउत से सवाल किया कि यदि एक मुलाकात से विपक्षी गठबंधन डगमगा सकता है, तो इसकी नींव ही कमजोर है। उन्होंने याद दिलाया कि राजनीति भावनाओं से नहीं, बल्कि गणित और सूझबूझ से चलती है।