साकीनाका में छात्रों के दस्तावेजों से खोले 75 फर्जी बैंक खाते, 50 करोड़ के साइबर फ्रॉड में 5 गिरफ्तार

Sakinaka Police Station: साकीनाका पुलिस ने छात्रों के नाम पर 75 फर्जी बैंक खाते खोलकर 50 करोड़ का साइबर फ्रॉड करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। बैंक कर्मचारी समेत 5 आरोपी गिरफ्तार।
Sakinaka: 75 fake bank accounts opened using students' documents; 5 arrested in ₹50 crore cyber fraud
साइबर धोखाधड़ी घोटाला, प्रतीकात्मक तस्वीरसोर्स- सोशल मीडिया
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Sakinaka Fake Bank Account Cyber Fraud Scam: साकीनाका पुलिस ने एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह ने कल्याण और नवी मुंबई के पांच कॉलेज छात्रों को पार्ट-टाइम, नौकरी का झांसा देकर उनके आधार और पैन कार्ड हासिल कर लिए। नौकरी तो नहीं मिली, लेकिन उनके पहचान पत्रों, तस्वीरों और बायोमेट्रिक अंगूठे के निशानों का दुरुपयोग करके एक राष्ट्रीयकृत बैंक में 11 फर्जी खाते खोल दिए गए।

हैरान करने वाली बात यह है कि महज 15 दिनों के भीतर इन खातों के जरिए करीब 9 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेन-देन किया गया। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को पूरे भारत में फैले एक बड़े नेटवर्क का पता चला। गिरोह ने मुंबई और आसपास के छात्रों के दस्तावेजों से कुल 75 फर्जी खाते खोले थे।

10 जनवरी से 5 मार्च के बीच इन खातों से साइबर अपराध के लगभग 50 करोड़ रुपये घुमाए गए थे। इस मामले में पुलिस ने बैंक के ऑफिस बॉय रूपेश ठाकुर, बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट योगेश वाडकर, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर साहिल कैप्टन, डिलीवरी वर्कर प्रसाद रायकर और शिवम दुबे को गिरफ्तार किया है। शुरुआत में स्थानीय पुलिस स्टेशनों से मदद न मिलने पर पराडकर ने वकील के जरिए 25 मार्च को साकीनाका पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई।

पुलिस ने 25 मार्च को दर्ज एफआईआर के आधार पर कार्रवाई करते हुए 5 अप्रैल से 3 मई के बीच बैंक के ऑफिस बाँय रूपेश ठाकुर (38), बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट योगेश वाडकर उर्फ पाटिल (37), सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर साहिल जावेद कैप्टन (22), डिलीवरी वर्कर प्रसाद रायकर (26) और शिवम धुबे (23) को गिरफ्तार किया है। दर्ज मामले के अनुसार, पीड़ित छात्रों यश पराडकर (20), अनंत यादव (20), अभिषेक तिवारी (21), सक्षम भट्ट (19) और हरदीप तिवारी (21) को उनके सहपाठी हर्षद वानखेड़े (20) ने ही मुख्य आरोपी साहिल कैप्टन से मिलवाया था।

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सोशल मीडिया पर मिली जानकारी

आरोपी ठाकुर बैंक किट चुराकर उन्हें टेलीग्राम पर मिले निर्देशों के आधार पर महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान में भेजता था। इस पूरे फर्जीवाड़े की भनक कानून के छात्र यश पराडकर को लगी। जब उन्हें नौकरी की कोई खबर नहीं मिली और उन्होंने सोशल मीडिया पर फर्जी नौकरी के जरिए होने वाले साइबर अपराधों के बारे में पढ़ा।

अपने दोस्तों के साथ मिलकर जब उन्होंने बैंकों में पड़ताल की, तो उनके नाम पर 11 चालू खाते मिले, जिनमें से दो को दिल्ली और मध्य प्रदेश की साइबर पुलिस पहले ही फ्रीज कर चुकी थी।

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