'भाषा प्रेम बीमारी है तो...', मोहन भागवत के बयान पर भड़के राज ठाकरे, गोमांस और गुजरात का दिया हवाला

Raj Thackeray vs Mohan Bhagwat: मोहन भागवत द्वारा भाषा आंदोलन को 'बीमारी' बताने पर राज ठाकरे ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने इसे मराठी अस्मिता का अपमान बताया और संघ पर कई सवाल उठाए।
Raj Thackeray And Mohan Bhagwat
Raj Thackeray And Mohan Bhagwat (फोटो क्रेडिट-X)
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RSS Linguistic Movement Statement: मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी समारोह में सरसंघचालक मोहन भागवत के एक बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद पैदा कर दिया है। वर्ली के नेहरू सेंटर में आयोजित 'संघ यात्रा के 100 वर्ष- नया क्षितिज' व्याख्यान के दौरान भागवत द्वारा भाषा आंदोलन को 'बीमारी' बताए जाने पर मनसे (MNS) अध्यक्ष राज ठाकरे बुरी तरह भड़क गए हैं।

राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट लिखकर संघ प्रमुख को आड़े हाथों लिया और उनके भाषण को 'नीरस और उबाऊ' करार दिया। राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि संघ प्रमुख का कार्यक्रम केवल सरकारी डर के कारण सफल दिखा, न कि लोगों के प्रेम के कारण।

"बीमारी नहीं, अस्तित्व की लड़ाई है": राज ठाकरे का पलटवार

राज ठाकरे ने मोहन भागवत के उस बयान पर आपत्ति जताई जिसमें उन्होंने कहा था कि भाषा के लिए आंदोलन करना एक बीमारी है। राज ठाकरे ने तर्क दिया कि यदि अपनी भाषा और क्षेत्र के प्रति प्रेम एक बीमारी है, तो यह 'बीमारी' कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, पंजाब और यहाँ तक कि गुजरात में भी व्याप्त है। उन्होंने पूछा, "जब बाहरी लोग किसी राज्य में आकर स्थानीय संस्कृति और भाषा का अपमान करते हैं, तो क्या स्थानीय लोगों का असंतोष जताना बीमारी है?" उन्होंने भागवत को याद दिलाया कि देश में राज्यों का पुनर्गठन भाषाई आधार पर ही हुआ था।

गुजरात और गोमांस निर्यात पर उठाए सवाल

राज ठाकरे ने संघ की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों को गुजरात से निकाला गया, तब मोहन भागवत वहां 'सद्भाव' का पाठ पढ़ाने क्यों नहीं गए? उन्होंने संघ को 'अप्रत्यक्ष राजनीतिक रुख' छोड़ने की सलाह देते हुए कई गंभीर मुद्दों पर घेरा:

गोमांस निर्यात: 2014 में भारत गोमांस निर्यात में 9वें स्थान पर था, जो अब दूसरे स्थान पर पहुँच गया है, इस पर संघ चुप क्यों है?

हिंदी थोपना: क्या भागवत में सरकार को देश पर हिंदी थोपने के लिए फटकार लगाने का साहस है?

भैयाजी जोशी का बयान: उन्होंने याद दिलाया कि कैसे कुछ समय पहले भैयाजी जोशी ने मुंबई की भाषा को लेकर विवादित बयान देकर गुजरातियों को लुभाने की कोशिश की थी।

"मराठी और महाराष्ट्र हमारे लिए सर्वोपरि"

मनसे प्रमुख ने स्पष्ट किया कि उनके लिए हिंदुत्व और मराठी अस्मिता अलग नहीं हैं, लेकिन वे मराठी भाषा के साथ किसी भी समझौते को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि लोग भागवत का 'उबाऊ प्रवचन' सुनने नहीं, बल्कि नरेंद्र मोदी सरकार के डर से कार्यक्रम में आए थे। ठाकरे ने अंत में चेतावनी देते हुए कहा कि महाराष्ट्र में भाषाई और क्षेत्रीय पहचान हमेशा बनी रहेगी और जब भी इस पर प्रहार होगा, महाराष्ट्र पूरी शक्ति से विद्रोह करेगा। संघ द्वारा इस तीखे हमले पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

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