

Raj Thackeray On Vishwas Nangre Patil: महाराष्ट्र की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में उस समय भारी खलबली मच गई, जब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने राज्य के सबसे चर्चित और कड़क छवि वाले वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी विश्वास नांगरे पाटिल पर बेहद तीखा और सीधा हमला बोल दिया। राज ठाकरे ने नांगरे पाटिल पर 'दोहरी निष्ठा' रखने का आरोप लगाते हुए उनके और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संबंधों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
मनसे प्रमुख ने दो टूक शब्दों में कहा कि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कर्तव्य केवल संविधान और खाकी के प्रति होना चाहिए, न कि किसी संगठन या विचारधारा के प्रति। इस बयान के बाद राज्य में नौकरशाही की राजनीतिक निष्पक्षता को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।
हाल ही में महाराष्ट्र में आयोजित हुए एक बड़े 'हिंदू सम्मेलन' में आईपीएस विश्वास नांगरे पाटिल शामिल हुए थे, जहां उन्होंने मंच से आरएसएस और उसके संस्थापकों के योगदान की जमकर सराहना की थी। इसी बात पर कड़ा एतराज जताते हुए राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पर लिखा, "कहने को तो ये सम्मेलन गैर-राजनीतिक बताए जाते हैं, लेकिन पर्दे के पीछे इनकी टाइमिंग और एजेंडा पूरी तरह राजनीतिक होता है।
किसी भी सरकारी अधिकारी, खासकर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का ऐसे मंचों पर जाना बिल्कुल अनुचित है। अगर नांगरे पाटिल को संघ के प्रति इतना ही गहरा लगाव और प्रेम है, तो उन्हें तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए और खुलकर भाजपा या आरएसएस से जुड़ जाना चाहिए।"
राज ठाकरे ने आईपीएस अधिकारी विश्वास नांगरे पाटिल की निष्ठा पर व्यंग्य कसते हुए कहा, "हम तो आज तक यही सोचते थे कि विश्वास नांगरे पाटिल जो खाकी वर्दी पहनते हैं, वह महाराष्ट्र पुलिस विभाग और कानून व्यवस्था का गौरवशाली प्रतीक है। लेकिन उनके इस आचरण को देखकर अब ऐसा लगने लगा है कि उनकी खाकी वर्दी पुलिस की नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पुराने खाकी हाफ पैंट के रंग से प्रभावित और जुड़ी हुई है।"
ठाकरे ने आरोप लगाया कि आज के दौर में सत्ता के करीबी अधिकारियों के लिए रिटायरमेंट के बाद पुनर्वास (पुनर्नियुक्ति या राजनीतिक टिकट) की गारंटी पहले से ही तय रहती है, और यह कदम भी उसी का हिस्सा नजर आता है।
महायुती सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए राज ठाकरे ने मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से पूछा कि क्या वे पुलिस विभाग में इस तरह के भगवाकरण और दोहरी निष्ठा को मौन स्वीकृति दे रहे हैं? अपनी बात को पुख्ता करने के लिए उन्होंने 14 साल पुराना एक उदाहरण पेश किया।
राज ठाकरे ने कहा, "साल 2012 में जब रजा अकादमी के दंगों के विरोध में मनसे ने मुंबई में एक बड़ा मोर्चा निकाला था, तब पुलिस का मनोबल बढ़ाने के लिए हमारे मंच पर एक साधारण पुलिस कॉन्स्टेबल आया था और उसने मेरा अभिनंदन किया था। उस समय की तत्कालीन सरकार ने इसे 'सर्विस रूल' और निष्पक्षता का उल्लंघन मानते हुए उस गरीब कॉन्स्टेबल को तत्काल अनिवार्य अवकाश पर भेजकर सस्पेंड कर दिया था। तो आज जब एक इतना बड़ा आईपीएस अधिकारी सरेआम एक संगठन के मंच पर जाकर कसीदे पढ़ रहा है, तो क्या यह सरकार नांगरे पाटिल के खिलाफ भी वही सख्त रुख अपनाएगी? अगर आज हम चुप रहे, तो यह कल के लिए बेहद खतरनाक परंपरा की नींव रख देगा।" उन्होंने नांगरे पाटिल से अनुरोध किया कि वे एक सक्षम अधिकारी हैं और उन्हें अपने विवेक को किसी दल के पास गिरवी नहीं रखना चाहिए।