

Raj Thackeray Questions BJP: स्वातंत्र्यवीर सावरकर की 143वीं जयंती पर मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने कहा कि जो लोग उनके नाम पर वोट मांग रहे हैं, क्या उन्होंने कभी सावरकर को पढ़ा या समझा है। ठाकरे के इस तंज को सत्तारूढ़ बीजेपी पर सीधा निशाना माना जा रहा है, क्योंकि राज के अनुसार सावरकर किसी अंधानुकरण के खिलाफ थे। राज ठाकरे ने कहा कि सावरकर हिंदू राष्ट्रवाद के विचारक, समाज सुधारक और विज्ञाननिष्ठ व्यक्ति थे, जिनका मानना था कि हर बात को तर्क से परखा जाए।
उन्होंने सवाल किया कि जो लोग आज सावरकर का जयजयकार कर वोटों के ध्रुवीकरण का प्रयास कर रहे हैं, क्या वे सावरकर के विचारों को अपने आचरण में लाने को तैयार हैं। उन्होंने बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस को भी समेटते हुए कहा कि सावरकर न तो विरोधियों को पूरी तरह समझ में आए
महाराष्ट्र में 'वाट्सएप यूनिवर्सिटी' और जातिवाद पर चिंता मनसे प्रमुख ने महाराष्ट्र में 'वाट्सएप यूनिवर्सिटी' के अंधानुकरण पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सावरकर की भूमि पर बिना तर्क के झूठ को सच मान लिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां सावरकर ने जातिवाद के खात्मे की लड़ाई लड़ी, वहीं आज जातियों के नाम पर सिर फोड़े जा रहे हैं और सत्ताधारी इसको बढ़ावा दे रहे हैं।
ठाकरे ने कहा कि सावरकर प्रखर हिंदू थे, लेकिन धर्म की त्रुटियों पर भी प्रहार किया। उनकी असली श्रद्धांजलि परंपरा के उत्तम पहलुओं को तर्क के साथ अपनाना है, न कि केवल उनकी तस्वीरों से धर्म में वैमनस्यता बढ़ानी है। राज ठाकरे का यह गहरा वार भाजपा नेताओं को बहुत चुभा और भाजपा के खेमे से प्रतिक्रिया आना शुरु हुआ।
बीजेपी मुंबई प्रदेश अध्यक्ष अमित साटम ने राज ठाकरे पर पलटवार करते हुए कहा कि सावरकर के नाम पर राजनीति कौन करता है, यह महाराष्ट्र जानता है। सावरकर ने हिंदुत्व से देश को एकजुट करने का काम किया, जबकि ठाकरे खुद जाति और प्रांत के नाम पर वैर फैलाते हैं। साटम ने कहा कि बहुतों को सावरकर को पढ़ने और उनके जैसा जीने की जरूरत है।