

Raj Thackeray Post On Veer Savarkar Jayanti: वीर सावरकर की जयंती के अवसर पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सावरकर को श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही आज सावरकर के नाम पर हो रही राजनीति पर भी बड़ी बात कही। उन्होंने लिखा कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना, स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर की स्मृति को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करती है।
सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए राज ठाकरे ने मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य पर तीखी आलोचना की। विपक्ष तथा सत्ताधारी दल दोनों को ही कड़ी फटकार लगाई। राज ठाकरे ने एक तीखा सवाल उठाया कि आखिर सावरकर को उन लोगों ने सचमुच कितना समझा है, जो केवल अपने राजनीतिक स्वार्थों को साधने के लिए उनका महिमामंडन करते हैं?
राज ठाकरे ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि आज स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर की जयंती है। सावरकर एक दार्शनिक थे जिन्होंने हिंदू राष्ट्रवाद की अवधारणा प्रस्तुत की। वे एक सक्रिय धार्मिक और सामाजिक सुधारक थे, और उतने ही विज्ञान पर आधारित एक कट्टर तर्कवादी भी थे। मेरी नजर में, सावरकर हमारे राष्ट्र की उन महान विभूतियों में से एक हैं, जिन्हें उनके आलोचकों ने कभी पूरी तरह से समझा या सही मायने में आत्मसात नहीं किया।
राज ठाकरे ने राजनीतिक विरोधियों पर निधाना साधते हुए लिखा कि जो लोग वर्तमान में केवल सावरकर का महिमामंडन करके वोट बटोरने की कोशिश कर रहे हैं, क्या उन्होंने सावरकर की रचनाएं पढ़ी भी हैं। उन्हें समझना तो दूर की बात है, इस पर गहरा संदेह बना हुआ है कि क्या वे सचमुच सावरकर को समझ सकते हैं। एक ऐसे व्यक्ति को जिन्होंने हर अवधारणा को अपनी बुद्धि की कसौटी पर कसने पर जोर दिया, ताकि उसकी वैधता निर्धारित की जा सके? सावरकर ने कभी भी किसी एक व्यक्ति के अंधाधुंध महिमामंडन का समर्थन नहीं किया। उनका दृढ़ विश्वास था कि हर विचार की व्यक्तिगत रूप से तर्क और विज्ञान की कसौटी पर जांच की जानी चाहिए। संक्षेप में कहें तो, व्यक्ति को स्वतंत्र रूप से यह सत्यापित करना चाहिए कि क्या सत्य है और क्या असत्य।
राज ठाकरे ने अपनी पोस्ट में लिखा कि यह सब कहने का एकमात्र कारण महाराष्ट्र की वर्तमान स्थिति है। ये वही धरती जहां सावरकर का जन्म हुआ था। यहां, "WhatsApp University" पर जो कुछ भी प्रसारित होता है, उसे बिना उसकी सटीकता की जांच किए या एक पल रुककर उस पर विचार किए बिना, पूर्ण सत्य के रूप में आंख मूंदकर स्वीकार करने की एक उन्मादी दौड़ शुरू हो गई है।
इसी महाराष्ट्र में, राजनेता तेजी से ढोंगी बाबाओं और पाखंडियों के जाल में फंसते नजर आ रहे हैं। इसके अलावा, हमारी सच्ची पहचान और महाराष्ट्र की गौरवशाली विरासत पर चिंतन करने के बजाय, हमें उत्सवों और DJ-युक्त समारोहों में उलझाकर और भटकाकर रखा जा रहा है।
वीर सावरकर हिंदू धर्म के एक कट्टर अनुयायी थे। फिर भी जब उसी धर्म के भीतर की कमियों और दोषों की आलोचना करने की बात आती थी तो वे कभी हिचकिचाते या पीछे नहीं हटते थे। हालांकि, आज सावरकर के अपने ही महाराष्ट्र में उनकी छवि का दुरुपयोग केवल धर्म के नाम पर वैमनस्य और विभाजन फैलाने के लिए किया जा रहा है। उसी धरती पर, जहां उन्होंने जाति व्यवस्था को समाप्त करने के उद्देश्य का समर्थन किया था, लोग अब जाति-आधारित पहचानों को लेकर हिंसक झड़पों और रक्तपात में लिप्त हैं। और यह सत्ताधारी शक्तियां ही हैं जो सक्रिय रूप से इस विभाजनकारी माहौल को हवा दे रही हैं और पोषित कर रही हैं।
राज ठाकरे ने कहा कि हर समय सावरकर की बुराई या तिरस्कार करने वालों को छोड़ दाे, पर जो लोग उनका इस्तेमाल राजनीति के लिए कर रहे हैं उन्हें कौन से सावरकर समझ में आते हैं? सावरकर के कौन से विचार राजनेताओं ने अपने आचरण में लाए हैं।
मनसे प्रमुख ने कहा कि पिछले दो महीनों में मैंने दो अलग-अलग मौकों पर अपने भाषणों के जरिए यह बताने की कोशिश की है कि महाराष्ट्र बौद्धिक और वैचारिक रूप से कितना समृद्ध और प्रगतिशील रहा है। इसके पीछे का तर्क सीधा-सा है। अगर हम यह भूल जाएं कि हम कभी कौन थे, तो हम अपने भविष्य का रास्ता कैसे तय कर पाएंगे? इसके अलावा, अगर हम इस मार्गदर्शन के लिए सत्ता के भूखे नेताओं और WhatsApp University द्वारा फैलाए गए झूठे किस्सों पर निर्भर रहना चुनते हैं, तो महाराष्ट्र का भविष्य सचमुच बहुत ही अनिश्चित और खतरे में होगा।
राज ठाकरे ने कहा कि हम कौन थे इसे स्वीकार करना, अपनी विरासत के बेहतरीन तत्वों को अपनाना और सबसे जरूरी बात हर विचार को तर्क और बुद्धि की कसौटी पर कसना, यही सावरकर को दी गई सच्ची श्रद्धांजलि है। इससे कम कुछ भी करना महज एक औपचारिकता होगी।