

Priyanka Chaturvedi on CM Vijay Swearing-in Ceremony: तमिलनाडु की सत्ता की बागडोर अब सिनेमाई पर्दे से निकलकर राजनीति के मैदान में आए जोसेफ विजय के हाथों में है। चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित एक भव्य समारोह में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। विजय के मंच पर पहुँचते ही पूरा स्टेडियम 'विजय-विजय' के नारों से गूंज उठा। हालांकि, यह समारोह अपनी भव्यता के साथ-साथ एक दिलचस्प और कुछ हद तक असहज कर देने वाले पल का भी गवाह बना।
जैसे ही राज्यपाल ने शपथ की पहली पंक्ति पढ़ी, विजय ने अपने हाथ हिलाते हुए और जनता को संबोधित करते हुए इस तरह बोलना शुरू किया जैसे वे किसी चुनावी रैली में भाषण दे रहे हों। यह देख राज्यपाल ने उन्हें बीच में ही टोक दिया और इशारों में समझाया कि यह संवैधानिक शपथ की प्रक्रिया है, जनसभा नहीं। विजय ने तुरंत अपनी गलती सुधारी और मुस्कुराते हुए विधिवत शपथ पूरी की।
शिवसेना (UBT) की तेजतर्रार नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने इस घटनाक्रम का वीडियो वायरल होने के बाद 'एक्स' (Twitter) पर तंज कसने में देरी नहीं की। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में लिखा, "क्या शपथ ग्रहण से पहले भाषण दिया गया था और फिर राज्यपाल ने उन्हें याद दिलाया कि वे यहाँ शपथ लेने आए हैं, भाषण देने नहीं? बस एक दोस्त के लिए पूछ रही हूँ।" उनके इस पोस्ट ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी है कि क्या फिल्मी सितारों के लिए संवैधानिक प्रोटोकॉल समझना चुनौतीपूर्ण होता है।
समारोह की गंभीरता और महत्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें राहुल गांधी विशेष रूप से शामिल हुए। विजय के साथ कई फिल्मों में काम कर चुकीं अभिनेत्री तृषा कृष्णन और दक्षिण भारतीय सिनेमा के कई बड़े चेहरे भी वहां मौजूद थे। समर्थकों के लिए यह किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म के क्लाइमेक्स जैसा अनुभव था, जहाँ उनका चहेता सितारा अब राज्य का 'नायक' बन चुका था।
सोशल मीडिया पर जोसेफ विजय के इस व्यवहार को लेकर दो धड़े बन गए हैं। समर्थकों का कहना है कि यह विजय का अपना सहज स्टाइल है और वे अपनी जनता से जुड़ने का कोई मौका नहीं छोड़ते। वहीं, आलोचकों और विपक्षी नेताओं का मानना है कि संवैधानिक पदों की एक गरिमा होती है और शपथ ग्रहण जैसे गंभीर अवसर पर 'फिल्मी अभिनय' से बचा जाना चाहिए। बहरहाल, विजय ने अब औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री का कार्यभार संभाल लिया है।