

Priyanka Chaturvedi On Vijeta Dahiya Burger Video: दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोमवार (20 जुलाई) को आयोजित 'संसद मार्च' और भीषण विरोध प्रदर्शनों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता विजेता दहिया का एक चौंकाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बड़ा राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया है। प्रदर्शनकारी छात्रों और पुलिस के बीच चल रही झड़पों के बीच सीजेपी प्रवक्ता नेताजी सुभाष पैलेस मेट्रो स्टेशन पर आराम से बर्गर खाते नजर आए।
इस घटना का वीडियो सार्वजनिक होने के बाद शिवसेना (यूबीटी) की नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने विजेता दहिया और उनकी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। प्रियंका ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए सवाल उठाया कि क्या सीजेपी नेताओं ने सड़कों पर उतरे युवाओं और छात्रों को केवल पुलिस की लाठियां खाने के लिए लावारिस छोड़ दिया है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सीजेपी प्रवक्ता की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए लिखा, "हर मंच पर नाचते-गाते रहने वाले और पूर्व में स्वामी प्रेमानंद महाराज का अपमान करने वाले सीजेपी प्रवक्ता विजेता दहिया क्या कल के मुख्य विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए थे? क्या यह बात पूरी तरह सच है?"
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एक यूजर द्वारा बर्गर खाने की पुष्टि किए जाने पर प्रियंका ने आगे लिखा कि विजेता का एक अजीबोगरीब बयान भी सामने आया है, जिसमें वे कह रहे हैं कि चूंकि वे कोई निर्वाचित जनप्रतिनिधि नहीं हैं, इसलिए उनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है और वे किसी के प्रति जवाबदेह नहीं हैं। प्रियंका ने चुभता सवाल पूछा कि क्या जनता और छात्रों का नेतृत्व करने का दावा करने वाले नेताओं में कोई नैतिक जिम्मेदारी नहीं बची है?
पूरा विवाद सोमवार दोपहर करीब 2 बजे का है, जब जंतर-मंतर पर तनाव चरम पर था। उसी दौरान नेताजी सुभाष पैलेस मेट्रो स्टेशन पर आयुष और ऋतिक नाम के दो युवकों ने विजेता को बर्गर खाते हुए कैमरे में कैद कर लिया और उनसे सवाल किया कि वे आंदोलन स्थल पर क्यों नहीं हैं। युवकों ने आरोप लगाया कि नेताओं ने आम जनता को लाठियां खाने के लिए छोड़ दिया है और खुद आराम फरमा रहे हैं।
मामला गर्माने के बाद विजेता दहिया ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा कि वे पिछले कई दिनों और रातों से लगातार जाग रहे थे और सो नहीं पाए थे, जिसके चलते शारीरिक थकान के कारण वे जंतर-मंतर नहीं पहुंच सके। हालांकि, उनके इस तर्क से असंतोष थमा नहीं है और अब छात्रों के साथ-साथ कई राजनीतिक दल भी सीजेपी को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।