बांद्रा स्काईवॉक तोड़ने की योजना, 14 साल पहले MMRDA ने किया था निर्माण
- Written By: प्रभाकर दुबे
मुंबई: बांद्रा पूर्व (Bandra East) में स्टेशन से बीकेसी (BKC)को जोड़ने वाले 14 साल पुराने स्काईवॉक (Skywalk) को तोड़ने की योजना बनाई गई है। उल्लेखनीय है कि 2007-08 में एमएमआरडीए (MMRDA) ने उक्त स्काईवॉक का निर्माण किया था और बाद में रखरखाव के लिए इसे बीएमसी (BMC) को सौंप दिया।
इस समय यह स्काईवॉक जीर्णशीर्ण अवस्था में पहुंच गया है। बताया गया कि बीएमसी ने इसे तोड़कर फिर से बनाए जाने का प्लान बनाया है। इसके लिए 18.69 करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
2019 में हुआ बंद
फ्लाईओवर स्टील का बना था, इसलिए प्रदूषण और खाड़ी की नमकीन खराब हवा के कारण यह जीर्ण-शीर्ण हो गया। 2019 के मानसून के दौरान बांद्रा पूर्व में इस स्काईवॉक का एक हिस्सा गिर गया, जिससे एक महिला घायल हो गई थी। इस घटना के बाद मुंबई में कई स्काईवॉक की स्थिति को लेकर ऑडिट का आदेश दिया गया था। बीएमसी स्काईवॉक के एक हिस्से को संरचनात्मक रूप से मजबूत बनाने के लिए तोड़ने पर विचार कर रही थी, लेकिन लॉकडाउन के कारण योजना के क्रियान्वयन में देरी हुई।
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2019 से स्काईवॉक को कर दिया गया था बंद
2019 से स्काईवॉक आम जनता के लिए बंद कर दिया गया। इसके बाद बीएमसी ने तकनीकी सलाहकार नियुक्त कर फ्लाईओवर का मसौदा, रूपरेखा, योजना और बजट बनाने के लिए कहा। सलाहकार के अनुसार 16.20 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत तय की गई और निविदाएं मंगाई गईं। आठ कंपनियों ने बोली में रुचि दिखाई है। इनमें मेसर्स एन ए कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड अनुमानित लागत से 2.49 करोड़ कम में काम करने को तैयार है। बीएमसी ने इस कंपनी को प्राथमिकता दी है। बीएमसी ने कंपनी से कहा है कि वह कुल लागत का एक फीसदी बीएमसी के पास सिक्योरिटी डिपॉजिट के तौर पर रखे। निर्माण कंपनी को 18 महीने के भीतर अपना काम पूरा करना होगा।
एमएमआरडीए के 23 स्काईवॉक
बताया गया कि एमएमआरडीए ने शहर में 23 स्काईवॉक का निर्माण किया है। इसके निर्माण पर लगभग 700 करोड़ रुपए खर्च हुए और वार्षिक रखरखाव लगभग 2.5 करोड़ रुपए की राशि खर्च की जाती रही है। अधिकांश स्काईवॉक ड्रग पेडलर्स और असामाजिक तत्वों के अड्डे बन गए हैं। पिछले दिनों पालकमंत्री असलम शेख ने आरोप लगाया था कि एमएमआरडीए की स्काईवॉक योजना में जनता के पैसे की बर्बादी हुई है। आईआईटी बॉम्बे या वीजेटीआई प्रोफेसर और एक अतिरिक्त मुख्य सचिव (शहरी विकास) के नेतृत्व में एक विशेष पैनल नियुक्त कर स्काईवॉक की आवश्यकता के मामले की समीक्षा होनी चाहिए।
