महाराष्ट्र के 7444 गांवों में श्मशान नहीं! फडणवीस सरकार का बड़ा फैसला, अब इस शर्त के बिना नहीं मिलेगा फंड

Maharashtra Villages Without Crematorium: महाराष्ट्र के 7 हजार से ज्यादा गांवों में श्मशान घाट नहीं है। विधानसभा में यह मुद्दा उठने के बाद अब इस मामले में फडणवीस सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
No Development Funds In Maharashtra Without A Crematorium
महाराष्ट्र के 7444 गांवों में श्मशान घाट नहीं (सोर्स: AI)
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No Development Funds In Maharashtra Without A Crematorium: देश के सबसे विकसित और आर्थिक रूप से समृद्ध राज्यों में शुमार महाराष्ट्र से एक ऐसी कड़वी सच्चाई सामने आई है, जिसने प्रशासन और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य के हजारों गांवों में आज भी अंतिम संस्कार के लिए श्मशान भूमि जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं है। इस अमानवीय स्थिति को देखते हुए अब राज्य सरकार ने एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है।

महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने साफ कर दिया है कि अब से गांवों को किसी भी अन्य विकास कार्य के लिए सरकारी बजट तभी आवंटित किया जाएगा, जब वे अपने गांव में श्मशान भूमि होने का आधिकारिक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करेंगे।

महाराष्ट्र के के 7,444 गांवों में आज भी श्मशान नहीं होने से मृत परिजनों के अंतिम संस्कार के लिए लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस अमानवीय स्थिति को अब राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है। राज्य सरकार ने अब विकास कार्यों के लिए निधि देने से पहले गांवों में श्मशान भूमि होने का प्रमाण मांगने का फैसला किया है। मंगलवार को विधानसभा में यह मुद्दा उठने पर ग्राम विकास मंत्री जयकुमार गोरे ने यह बड़ी घोषणा की।

हर 5वां गांव श्मशान की सुविधा से वंचित

महाराष्ट्र में कुल 40,760 राजस्व गांव हैं जिनमें से 32,791 गांवों में श्मशान भूमि मौजूद है, जबकि करीब 20 प्रतिशत गांव अब भी इस सुविधा से वंचित हैं। मंत्री जयकुमार गोरे ने बताया कि राज्य में 2,820 ग्राम पंचायतें हैं और लगभग 80 प्रतिशत क्षेत्रों में ही श्मशान भूमि की व्यवस्था है।

मानसून के दौरान यह समस्या और गंभीर हो जाती है, जब कई गांवों में सूखी जगह उपलब्ध न होने के कारण नागरिकों को कमर तक पानी से गुजरकर दूसरी जगह अंतिम संस्कार करना पड़ता है। कुछ स्थानों पर मौजूद श्मशान भूमियों की हालत भी बेहद खराब बताई गई जहां छत के पत्रे उड़े हुए हैं और बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।

अब देना होगा प्रमाणपत्र

मंत्री जयकुमार गोरे ने विधानसभा में बोलते हुए स्पष्ट किया कि अब लोक प्रतिनिधियों को अन्य विकास कार्यों के लिए निधि तभी मिलेगी जब वे अपने क्षेत्र में श्मशान भूमि उपलब्ध होने का प्रमाण प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने कहा कि गांव में श्मशान भूमि है, यह दिखाना होगा। उसके बाद ही अन्य कार्यों के लिए निधि दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य सभी गांवों में सम्मानजनक अंतिम संस्कार की व्यवस्था सुनिश्चित करना है। इसी बीच यवतमाल जिले के मारेगांव में सरकारी जमीन उपलब्ध न होने के कारण श्मशान भूमि का सवाल खड़ा हुआ है। मंत्री गोरे ने विधानसभा में आश्वासन दिया कि जल्द इस समस्या का समाधान निकाला जाएगा।

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